नई दिल्ली : रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के नेतृत्व वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के 200 से ज्यादा डॉक्टरों और स्टाफ को शक के घेरे में ले लिया है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से पता चला कि ये ‘व्हाइट कॉलर’ टेरर मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ा हो सकता है। फरीदाबाद स्थित 78 एकड़ की इस यूनिवर्सिटी को अब रिक्रूटमेंट हब मानकर जांच हो रही है। एजेंसियां अब मॉड्यूल के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन जोड़ने में जुटी हैं, जबकि यूनिवर्सिटी में छापेमारी से स्टूडेंट्स में दहशत फैल गई है।
ब्लास्ट का काला अध्याय: कैसे फटा ‘डॉक्टरों का नेटवर्क’?
10 नवंबर की शाम रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास एक कार में IED ब्लास्ट हुआ, जिसमें 5 लोग घायल हो गए। मुख्य आरोपी ‘डॉ. उमर’ – जो अल-फलाह मेडिकल कॉलेज का पूर्व स्टूडेंट और स्टाफ था – ने खुद को उड़ाने की कोशिश की, लेकिन बच गया। जांच में पता चला कि उमर ने नूह (मेवात) में किराए के कमरे से कई मोबाइल फोन यूज किए, और उसके कॉन्टैक्ट्स में दर्जनों डॉक्टर शामिल हैं। CDR से 200 से ज्यादा नाम सामने आए – ज्यादातर अल-फलाह के पूर्व छात्र या कर्मचारी, जो अब NCR के क्लिनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर और मेडिकल स्टोर्स चला रहे हैं।
NIA और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने 25 से ज्यादा छापे मारे। फरीदाबाद, नूह, बल्लभगढ़ और गुरुग्राम में दुकानदारों, इमामों और फर्टिलाइजर डीलरों से पूछताछ हुई। एक गिरफ्तार डॉक्टर के क्लिनिक से CCTV फुटेज बरामद हुई, जिसमें उमर बैग लेकर मरीजों की मदद करता नजर आया। उसके फोन और कंप्यूटर से डिलीटेड मैसेज रिकवर हो रहे हैं, जो JeM के हैंडलरों से लिंक दिखाते हैं। एक फरार अंगनवाड़ी वर्कर की फैमिली को भी हिरासत में लिया गया, जो उमर के संपर्क में थी। कुल 1000 से ज्यादा लोगों से पूछताछ हो चुकी है, और 6 गिरफ्तारियां – 3 डॉक्टर, 1 मौलवी, 1 हवाला ऑपरेटर और 1 फर्टिलाइजर सप्लायर।
SIT ने यूनिवर्सिटी में अस्थायी कमांड सेंटर खोल दिया है। यूपी ATS, फरीदाबाद क्राइम ब्रांच और J&K पुलिस की टीमें रोजाना विजिट कर रही हैं। ED ने भी चेयरमैन जावेद सिद्दीकी को 13 दिन की कस्टडी में लिया है। लैंड प्रॉब में सामने आया कि यूनिवर्सिटी की जमीन पर संदिग्ध कंस्ट्रक्शन हुआ, जो रेडिकलाइजेशन का सेंटर हो सकता है। ब्लास्ट से पहले उमर ने ड्रोन और रॉकेट-स्टाइल IED से हमले प्लान किए थे, जो हमास स्टाइल अटैक की याद दिलाते हैं।
अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के लिंक उजागर होने के बाद हॉस्पिटल में मरीजों की संख्या 70% गिर गई। बुधवार को दर्जनों स्टाफ कारों में सामान लादकर भागे – एजेंसियां अब इन्हें ट्रैक कर रही हैं। स्टूडेंट्स डरे हुए हैं, क्लासेस सस्पेंड। एक स्टूडेंट ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम पढ़ने आए थे, टेरर के चक्कर में फंस गए।” यूनिवर्सिटी ने सफाई दी, “हम सहयोग कर रहे हैं, लेकिन बेगुनाहों को निशाना न बनाएं।”
SIT अब उमर के JeM कनेक्शन को पाकिस्तान और J&K के नौगाम ब्लास्ट (जहां 9 जवान शहीद हुए) से जोड़ रही है। हवाला रूट्स से फंडिंग, रेडिकलाइजेशन के लिए यूनिवर्सिटी का यूज – सबूत जुटाए जा रहे। गृह मंत्रालय ने अलर्ट जारी किया: NCR में डॉक्टरों के नेटवर्क पर नजर। विशेषज्ञों का कहना है, ये ‘सॉफ्ट टारगेट’ मॉड्यूल है, जहां प्रोफेशनल्स फंड और शेल्टर देते हैं
दिल्ली ब्लास्ट : 200 डॉक्टर शक के घेरे में, SIT ने संभाली कमान.. अल-फलाह के टेरर नेटवर्क के कनेक्शन जोड़ने में जुटीं एजेंसियां
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