कानपुर : फैक्ट्री के बंद कमरे में दम घुटने से चार युवा मजदूरों की दर्दनाक मौत, सुबह मिले शव; परिवारों पर छाया साया!

कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में सर्द रातों का कहर फिर दिखा। पनकी थाना क्षेत्र के डी-58, साइट नंबर-2 इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक ऑयल सीड्स कंपनी के बंद कमरे में ठंड से बचने के लिए कोयला जलाकर सोए चार युवा मजदूरों की जहरीले धुएं से दम घुटने की वजह से मौत हो गई। सुबह जब फैक्ट्री स्टाफ ने दरवाजा खोला, तो अंदर का मंजर देख सब सन्न रह गए – चारों लाशें बिस्तर पर पड़ी थीं। ये हादसा न सिर्फ परिवारों को तोड़ गया, बल्कि सर्दियों में अंगीठी के खतरे को फिर याद दिला गया।

क्या है हादसे का पूरा चक्रव्यूह?
रात करीब 10 बजे चारों मजदूर – राजू (22 वर्ष), सोहन (25 वर्ष), मोहन (28 वर्ष) और विष्णु (24 वर्ष) – कंपनी के एक छोटे से कमरे में सोने चले गए। बाहर तापमान 8 डिग्री से नीचे था, तो ठंड से कांपते हुए उन्होंने कोयले की अंगीठी जला ली। लेकिन कमरा बंद होने की वजह से कार्बन मोनोऑक्साइड का जहरीला धुआं बाहर न निकल सका और धीरे-धीरे कमरे को भर गया। रात भर धुएं में सांस लेते हुए चारों बेहोश हो गए, और सुबह 7 बजे फैक्ट्री मैनेजर ने दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब न मिला। अंदर घुसते ही धुएं की गंध और लाशें देखकर चीखें गूंज उठीं।

पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण कार्बन मोनोऑक्साइड पॉइजनिंग ही बताया गया। मजदूरों के चेहरे पर नीला दाग, सांस नली में धुआं जमा – सब कुछ इसकी तस्दीक कर रहा था। चारों बिहार के सीवान जिले के रहने वाले थे, जो कानपुर आकर मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहे थे। राजू की मां ने रोते हुए कहा, “बेटा कल ही फोन पर बोला था – मां, कल पैसे भेजूंगा। अब सिर्फ लाश ही आ रही है।” सोहन की पत्नी, जो दो बच्चों की मां थी, सदमे में बेहोश हो गई।

फैक्ट्री पर सवालों का तीर: सुरक्षा के नाम पर लापरवाही?
कंपनी मैनेजमेंट पर आरोप लगे कि मजदूरों के लिए अलग रहने की व्यवस्था नहीं थी। कमरे में वेंटिलेशन न होने और अंगीठी जलाने की मनाही न होने से ये हादसा हुआ। एसएसपी कानपुर ने कहा, “फैक्ट्री मालिक के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज होगा। मजदूरों को इंश्योरेंस और मुआवजे का पूरा पैकेज मिलेगा।” एनजीओ वर्कर्स यूनियन ने इसे ‘सर्दी का पहला शिकार’ बताते हुए सरकार से जागरूकता कैंप लगाने की मांग की। हर साल उत्तर भारत में ऐसे 50 से ज्यादा मामले दर्ज होते हैं, लेकिन सबक कम ही सीखा जाता है।

परिवारों का दर्द, सरकार का वादा
चारों शवों का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद बिहार भेजा जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता का ऐलान किया। विपक्ष ने इसे ‘मजदूरों की अनदेखी’ बताते हुए विधानसभा में हंगामा करने का वादा किया। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस डिटेक्टर और सुरक्षित हीटर की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।