बिहार: दो लाख से अधिक वृद्ध पेंशनभोगियों की हो चुकी है मौत …खुलासे पर जागी सरकार

पटना : बिहार सरकार की मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना, जो बुजुर्गों को आर्थिक सहारा देने का दावा करती है, आज एक बड़े घोटाले के चक्रव्यूह में फंसी नजर आ रही है। हालिया जांच में खुलासा हुआ है कि राज्य में करीब 2.5 लाख से अधिक वृद्ध पेंशनभोगियों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वे अभी भी ‘जिंदा’ दिखाए जा रहे हैं। उनकी पेंशन राशि सालों तक गायब होती रही, और सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ बढ़ता रहा। इस ‘मृत्यु रहस्य’ के खुलासे के बाद सरकार में हड़कंप मच गया है, और अब सुधार के वादे तेज हो गए हैं।

योजना के तहत 60 वर्ष से ऊपर के गरीब वृद्धों को मासिक 400 रुपये (80 वर्ष से अधिक उम्र वालों को 500 रुपये) की पेंशन दी जाती है, जो हाल ही में बढ़ाकर 1,100 रुपये करने की चर्चा में है। लेकिन समस्या तब उजागर हुई जब समाज कल्याण विभाग की ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि 2020 से 2025 तक की अवधि में लगभग 2.2 लाख पेंशनभोगी प्राकृतिक मौत का शिकार हो चुके हैं। फिर भी, उनके नाम लिस्ट से हटाए नहीं गए।

कटिहार, मुजफ्फरपुर और पटना जैसे जिलों से रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई मामलों में पेंशन रिश्तेदारों या फर्जी खातों में ट्रांसफर होती रही। एक उदाहरण कटिहार का है, जहां 75 वर्षीय विधवा जैतून निशा को आधिकारिक दस्तावेजों में ‘मृत’ घोषित कर पेंशन रोक दी गई, जबकि वे जिंदा हैं और हाल के चुनाव में वोट डाल चुकी हैं। उल्टे, कई मृतकों की पेंशन 2-3 साल तक चलती रही!

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, आधार-लिंक्ड पेमेंट सिस्टम (e-Labharthi) में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की कमी और ग्रामीण स्तर पर अपडेट न होने से यह अव्यवस्था फैली। राज्य में कुल 75 लाख से ज्यादा पेंशनभोगी हैं, और इस ‘फैंटम लिस्ट’ से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। विपक्ष ने इसे ‘नीतीश सरकार का पेंशन घोटाला’ करार देते हुए विधानसभा में हंगामा किया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, “बुजुर्ग मर गए, लेकिन पेंशन का ‘भूत’ जिंदा है। सरकार सोई हुई है या साजिश रच रही है?”
सरकार की प्रतिक्रिया: जागरण या नाटक?

खुलासे के एक दिन बाद ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समाज कल्याण मंत्री से फोन पर बात की। विभाग ने तत्काल ‘डेड लिस्ट वेरिफिकेशन ड्राइव’ शुरू करने का ऐलान किया, जिसमें ग्राम पंचायत स्तर पर घर-घर सर्वे होगा। “हमारे पास 2 लाख से ज्यादा केस सामने आए हैं, जिनमें मौत की पुष्टि के बाद पेंशन बंद की जाएगी। साथ ही, गलत वेरिफिकेशन पर दोषी अफसरों पर कार्रवाई होगी,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। इसके अलावा, पेंशन राशि को 1,000-1,500 रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट में विचाराधीन है, जो आगामी बजट में लागू हो सकता है।

यह मामला बिहार की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जहां एक तरफ बुजुर्गों को महंगाई के बोझ तले दबना पड़ रहा है, वहीं सरकारी लापरवाही से उनका हक छिन रहा है।