पटना : बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने को तैयार हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद नई सरकार का गठन तेजी से हो रहा है। 20 नवंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा, जहां नीतीश कुमार रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस कैबिनेट में 2 डिप्टी सीएम और कुल 20 मंत्री शामिल होंगे, जिसमें बीजेपी को 15, जेडीयू को 13 (मुख्यमंत्री सहित) बर्थ मिलेंगे। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 2 और अन्य सहयोगियों को 1-1 बर्थ दी जाएगी। एनडीए नेताओं के बीच लंबी चर्चाओं के बाद नामों की लिस्ट फाइनल हो चुकी है, जो विकास और सामाजिक न्याय पर फोकस करेगी।
शपथ ग्रहण से ठीक पहले मंगलवार को नीतीश कुमार ने गांधी मैदान का जायजा लिया, जहां डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और चीफ सेक्रेटरी प्रत्यया अमृत भी मौजूद थे। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। सुरक्षा के मद्देनजर गांधी मैदान को 20 नवंबर तक आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है।
एनडीए के सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे पर सहमति बन चुकी है। बीजेपी को सबसे ज्यादा 15 मंत्री पद मिलेंगे, जबकि जेडीयू को 13। एलजेपी (आरवी) को 2 और हिंदुस्तानी अवामी मोर्चा (सेक्युलर) जैसे छोटे सहयोगियों को 1-1 बर्थ। कुल मिलाकर 22 सदस्यीय कैबिनेट (मुख्यमंत्री सहित) होगी, लेकिन शुरुआती चरण में 20 मंत्री शपथ लेंगे। इसमें 5-6 नए चेहरे शामिल होंगे, जो युवा और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करेंगे। डिप्टी सीएम के पद पर बीजेपी के दो दिग्गजों का कब्जा होगा।
सूत्रों के हवाले से सामने आई लिस्ट के अनुसार, निम्नलिखित नाम शपथ ग्रहण के लिए तय माने जा रहे हैं। ये नाम एनडीए की आंतरिक चर्चाओं और विधानसभा चुनावों में योगदान पर आधारित हैं:
डिप्टी चीफ मिनिस्टर:
सम्राट चौधरी (बीजेपी) – मौजूदा डिप्टी सीएम, चुनाव प्रबंधन में अहम भूमिका।
विजय सिन्हा (बीजेपी) – पूर्व विधानसभा स्पीकर, विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय।
- मंत्री (बीजेपी से 13 संभावित)
- प्रेम कुमार (गया से 8 बार विधायक) – ग्रामीण विकास पर फोकस।
- दिलीप जायसवाल (बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष) – संगठनात्मक मजबूती।
- नरेंद्र नारायण (पूर्व मंत्री) – वित्त विभाग की संभावना।
- सुनील कुमार (नए चेहरे) – युवा प्रतिनिधित्व।
- रेणु देवी (महिला आरक्षण) – सामाजिक न्याय।
- समरी लाल (ओबीसी नेता)।
- कृष्णा मोहन (ईबीसी)।
- मनोज कुमार (अन्य)।
- मंत्री (जेडीयू से 8 संभावित)
- विजय कुमार चौधरी (पूर्व मंत्री, वरिष्ठ नेता)।
- श्रवण कुमार (स्वास्थ्य विभाग)।
- बिजेंद्र यादव (नए चेहरे)।
- उमेश सिंह कुशवाहा (जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष)।
- संजय झा (सांसद स्तर)।
- ललन सिंह (केंद्रीय कनेक्शन)।
- रामेश्वर राय (वरिष्ठ)।
- कांति देवी (महिला)।
- (कुल 13 में से, मुख्यमंत्री नीतीश सहित)।
ये नाम एनडीए की जातिगत संतुलन रणनीति पर आधारित हैं, जिसमें ओबीसी, ईबीसी, एससी-एसटी और महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। स्पीकर पद पर भी बीजेपी का दावा मजबूत है।
2025 के विधानसभा चुनावों में एनडीए ने 243 सीटों में से 200 से ज्यादा हासिल कर महागठबंधन को करारी शिकस्त दी। नीतीश कुमार ने 19 नवंबर को राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान को इस्तीफा सौंपा, और विधानसभा भंग की सिफारिश की। जेडीयू की विधायक दल बैठक में नीतीश को नेता चुना गया, जबकि एनडीए की बैठक में उन्हें गठबंधन नेता घोषित किया जाएगा। विपक्षी आरजेडी ने इसे ‘नीतीश का फिर पलटी मारना’ बताया, लेकिन एनडीए का फोकस विकास योजनाओं पर है।