यूपी में करोड़ों की जीएसटी चोरी के मामलों की जांच एसआईटी करेगी: भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का प्रयास

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में फैले जीएसटी चोरी के बड़े-बड़े मामलों की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। इन मामलों में करोड़ों रुपये की कर चोरी शामिल है, जिसमें फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और नकली फर्मों के जरिए धोखाधड़ी प्रमुख हैं।

एसआईटी की कमान पांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को सौंपी गई है, जो अगले 90 दिनों में रिपोर्ट सौंपेंगे। यह कदम केंद्र और राज्य स्तर पर बढ़ते जीएसटी घोटालों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जहां हाल के वर्षों में ₹7 लाख करोड़ से अधिक की चोरी का खुलासा हो चुका है।

करीब ढाई घंटे चली बैठक में अफसरों ने टीमों के सदस्यों को बताया कि एक सप्ताह में सभी केसों से संबंधित दस्तावेज जुटा लें। इसके बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी। साथ ही कहा कि वह जांच के दौरान किसी को गिरफ्तार करने, हिरासत में लेकर पूछताछ करने और चार्जशीट लगाने से पहले चर्चा करेंगे। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एसआईटी का गठन और जिम्मेदारियां

अधिकारियों की टी
म: एसआईटी में शामिल हैं आईजी स्तर के पांच आईपीएस – डॉ. राजीव कृष्ण (कानून व्यवस्था), मनोज कुमार जैन (विशेष सुरक्षा बल), अजय पाल शर्मा (लखनऊ जोन), अमित कुमार (प्रयागराज जोन) और राजेश कुमार द्विवेदी (आगरा जोन)। ये अधिकारी विभिन्न जोनों से चुने गए हैं ताकि जांच व्यापक हो।

जांच का दायरा: एसआईटी को 2024-25 में यूपी में दर्ज 5,000 से अधिक जीएसटी चोरी के मामलों की जांच सौंपी गई है, जिनमें कुल ₹15,000 करोड़ से अधिक की चोरी शामिल है। फोकस ITC फ्रॉड, फर्जी रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े घोटालों पर होगा।
समयसीमा: दल को 90 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें आरोपी फर्मों, लाभार्थियों और सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता का खुलासा होगा। उसके बाद कार्रवाई के लिए सिफारिशें सौंपी जाएंगी।

मामलों का बैकग्राउंडचोरी का पैमाना: केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर 2024 में सीजीएसटी अधिकारियों ने ₹1.88 लाख करोड़ की जीएसटी चोरी का पर्दाफाश किया, जिसमें यूपी के कई मामले शामिल हैं। 2024-25 में ही यूपी में ₹2,500 करोड़ से अधिक की चोरी दर्ज हुई, जिसमें 1,200 फर्जी फर्में पकड़ी गईं।

मुख्य घोटाले: नोएडा और गाजियाबाद में ITC फ्रॉड के बड़े रैकेट, जहां कंपनियां फर्जी बिलों से कर क्रेडिट ले रही थीं। लखनऊ और कानपुर में ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स से जुड़े मामलों में ₹500 करोड़ की चोरी का अनुमान। एक मामले में गौतम बुद्ध नगर के जीएसटी अधिकारी सतेंद्र बहादुर सिंह को ₹45,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।

सरकारी कदम: डिजिटलीकरण जैसे ई-इनवॉयसिंग, जीएसटी एनालिटिक्स और एआई टूल्स (जैसे NETRA और BIFA) से 10,700 फर्जी फर्में पकड़ी गईं, जिनसे ₹10,000 करोड़ की चोरी रुकी। यूपी सरकार अब सख्ती बढ़ा रही है।

विशेषज्ञों की रायराजस्व विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईटी से न केवल चोरी रुकेगी, बल्कि सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह जांच अंतरराज्यीय रैकेट को तोड़ेगी, जहां यूपी से गुजरात और महाराष्ट्र तक नेटवर्क फैला है।” विपक्ष ने इसे ‘देर आयद दुरुस्त आयद’ बताया, लेकिन सरकार इसे ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति का हिस्सा बता रही है।