चुनाव में हार के बाद राजनीति छोड़ेंगे प्रशांत किशोर? जन सुराज के प्रवक्ता ने कहा आगे की रणनीति पर PK खुद बोलेंगे

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी (JSP) की करारी हार के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) अब राजनीति के मैदान से किनारा कर लेंगे? चुनाव में JSP को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि उन्होंने 238 सीटों पर दांव लगाया था। पार्टी के प्रवक्ता पवन के. वर्मा ने स्पष्ट किया कि PK बिहार नहीं छोड़ेंगे, और पार्टी प्रदर्शन की ‘गहन समीक्षा’ करेगी।

वर्मा ने कहा, “PK का बिहार से जाना या न जाना उनका निजी फैसला है, लेकिन वे बिहार छोड़ नहीं सकते और बिहार भी उन्हें नहीं छोड़ेगा। नतीजे पूरे आने के बाद वे खुद भविष्य की योजनाओं पर प्रतिक्रिया देंगे।”

चुनावी हार का पूरा आंकड़ा

JSP का प्रदर्शन: पार्टी ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 3.44% वोट शेयर के साथ ‘शून्य’ पर सिमट गई। 68 सीटों पर ‘नोटा’ से भी कम वोट मिले। शुरुआती ट्रेंड्स में कुछ जगह लीड दिखी, लेकिन अंत तक सब गायब।

NDA की जीत: 243 में से 202 सीटें, जिसमें जेडीयू को 85, BJP को 77। महागठबंधन को मात्र 35।
PK का पुराना दावा: चुनाव से पहले PK ने कहा था, “जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें मिलीं तो राजनीति छोड़ दूंगा।” जेडीयू की 85 सीटों पर अब सवाल उठे, लेकिन प्रवक्ता ने इसे ‘नई राजनीति का प्रयास’ बताया।

प्रवक्ता का बयान: आगे की राहपवन के. वर्मा (प्रवक्ता): द हिंदू को दिए बयान में बोले, “पार्टी प्रदर्शन की सीरियस रिव्यू करेगी। तीन सालों की मेहनत बेकार नहीं गई। बेरोजगारी, शिक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त बिहार का एजेंडा अब हर पार्टी का हो गया।” उन्होंने PK के जाने की अफवाहों को खारिज किया। NDA पर आरोपहार के बाद PK ने चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा, “चुनाव में पैसों का अंधा बंटवारा हुआ। महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये का वादा वोट खरीदने का हथकंडा था।” उन्होंने मुस्लिम वोटरों को जोड़ न पाने को कमी मानी, लेकिन राजनीति छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया।

जन सुराज पार्टी के प्रवक्ता पवन वर्मा के मुताबिक, नीतीश इस चुनाव में ‘एक्स’ फैक्टर थे। लोगों को लगा था कि नीतीश कुमार का दौर खत्म हो गया। नीतीश पिछले 20 साल से सीएम हैं। लालू यादव के जंगल राज के बाद नीतीश का सबसे बड़ा योगदान कानून-व्यवस्था बहाल करने का था। उनका अपना व्यक्तित्व है। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि वे फ्यूचर के प्रधानमंत्री हो सकते थे।