लालू परिवार में खुली फूट: तेजस्वी ने घर से निकाला, रोहिणी आचार्य बोलीं- मेरा कोई परिवार नहीं, सवाल पूछा तो चप्पल से मारा जाएगा

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की करारी हार के बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार में सियासी महाभारत छिड़ गया है। RJD सुप्रीमो के छोटे बेटे तेजस्वी यादव पर उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें घर से निकाल दिया।

रोहिणी ने एयरपोर्ट पर फूट-फूटकर रोते हुए दावा किया, “मेरा कोई परिवार नहीं बचा। अगर संजय यादव या रमीज का नाम लूं तो गालियां दी जाती हैं, बदनाम किया जाता है और चप्पल से मारने की धमकी दी जाती है।” यह बयान राजनीतिक हलकों में भूचाल ला रहा है, जहां पहले ही तेज प्रताप यादव को परिवार से दूर किया गया था।

विवाद का पूरा घटनाक्रमघर छोड़ने का फैसला: शनिवार को रोहिणी आचार्य ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर राजनीति से संन्यास और परिवार से नाता तोड़ने की घोषणा की। इसके बाद वे पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी आवास से दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मेरा कोई परिवार नहीं है। संजय, रमीज और तेजस्वी से पूछिए, इन्होंने ही मुझे बाहर निकाला।” यह वही घर है जहां लालू, राबड़ी और तेजस्वी रहते हैं।

चुनावी हार का असर: RJD को महज 25 सीटें मिलीं, जो महागठबंधन की शर्मनाक हार थी। रोहिणी ने हार की जिम्मेदारी तेजस्वी के करीबी सलाहकारों पर डाली। उन्होंने कहा, “जो खुद को चाणक्य समझते हैं, उनसे सवाल पूछने पर दबाव डाला जाता है। पार्टी का हाल क्यों हुआ, इसका जवाब कोई नहीं देना चाहता।”

पिछले विवाद: चुनाव से पहले रोहिणी ने संजय यादव पर पार्टी को कमजोर करने का आरोप लगाया था और सिंगापुर चली गई थीं। काउंटिंग डे पर उन्होंने तेजस्वी को “गुड लक” कहा, लेकिन जवाब न मिलने से नाराजगी बढ़ी। तेज प्रताप को भी पहले घर से निकाल दिया गया था।

रोहिणी आचार्य का बैकग्राउंडरोहिणी लालू परिवार की सबसे मुखर सदस्य हैं। 2018 में उन्होंने एक किडनी दान कर पिता लालू की जान बचाई थी। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और RJD की युवा ब्रिगेड का चेहरा रहीं। लेकिन आंतरिक कलह से तंग आकर अब वे राजनीति से दूर हो रही हैं।राजनीतिक प्रभावयह फूट RJD के लिए बड़ा झटका है, खासकर 2027 के अगले चुनावों से पहले। विपक्षी दल इसे NDA की जीत का नतीजा बता रहे हैं, जबकि RJD समर्थक चुप्पी साधे हैं। लालू परिवार की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं, और यह विवाद बिहार की सियासत को नई दिशा दे सकता है। रोहिणी के दिल्ली पहुंचने के बाद और खुलासे हो सकते हैं।