कानपुर में फरार भूपेश अवस्थी के घर पुलिस का छापा: डेढ़ माह से हैं फरार, क्लासिक होटल विवाद में गैर-जमानती वारंट जारी

कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रमुख नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश अवस्थी पर पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। क्लासिक होटल विवाद से जुड़े 2011 के पुराने मामले में अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम की अदालत ने भूपेश अवस्थी और उनके वकील बेटे रोहित अवस्थी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। जूही थाने की पुलिस ने आज भूपेश अवस्थी के आवास पर छापेमारी की, लेकिन वे डेढ़ माह से फरार चल रहे हैं।

क्लासिक होटल कांड का इतिहास: यह विवाद 2011 का है, जब क्लासिक होटल की पूर्व मालकिन प्रज्ञा त्रिवेदी ने जूही थाने में डकैती, रंगदारी वसूली, मारपीट और अंग भंग (IPC धारा 326) के आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। प्रज्ञा ने दावा किया कि अखिलेश दुबे गैंग ने होटल पर जबरन कब्जा करने के लिए हिंसा का सहारा लिया। होटल के साझीदार ओम जायसवाल और अजय निगम के बीच भी पुराना विवाद था, जिसमें प्रज्ञा को दबाव का निशाना बनाया गया।


नए मोड़ और NBW: अखिलेश दुबे की हालिया गिरफ्तारी के बाद प्रज्ञा ने प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की, जिस पर कोर्ट ने अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। जांच में भूपेश अवस्थी, रोहित अवस्थी और अनुज निगम के नाम सामने आए। 5 नवंबर 2025 को NBW जारी हुआ, क्योंकि दोनों पिता-पुत्र पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुए। भूपेश पर गैंग से जुड़ाव और वसूली के आरोप हैं।

फरार होने का कारण: NBW जारी होने के बाद से भूपेश अवस्थी लगभग डेढ़ माह (अक्टूबर के मध्य से) से फरार हैं। वे पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लोकेशन बदल रहे हैं। रोहित अवस्थी ने जिला जज कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी है, जिसकी सुनवाई 6 नवंबर को निर्धारित है।

पुलिस कार्रवाई और वर्तमान अपडेटआज का छापा: जूही थाने की टीम ने भूपेश के आवास पर सुबह तलाशी ली, लेकिन वे मौके पर नहीं मिले। पुलिस ने घर की तलाशी ली और परिजनों से पूछताछ की। अन्य संदिग्धों की भी तलाश जारी है।

संबंधित आरोप: सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में भूपेश को “ब्लैकमेलर” कहा जा रहा है, जो झूठे रेप और छेड़छाड़ केस करवाकर वसूली करते थे। अखिलेश दुबे गैंग के साथ उनके कथित संबंध कई पुराने मामलों को फिर से खोल रहे हैं।

भूपेश अवस्थी का बैकग्राउंड: वे कानपुर के प्रमुख कर्मचारी नेता हैं, जिनके आंदोलनों से उत्तर-दक्षिण को जोड़ने वाला पुल बना। लेकिन हाल के वर्षों में आपराधिक मामलों से उनका नाम जुड़ गया है।