पटना – बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA की ऐतिहासिक जीत (202 सीटें) के ठीक अगले दिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ‘सफाई अभियान’ चला दिया। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा के पूर्व सांसद राजकुमार सिंह उर्फ आरके सिंह को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके साथ ही बिहार के एमएलसी अशोक कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी, कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल पर भी अनुशासन की गाज गिरी – दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
BJP ने तीनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा है, जिसमें पूछा गया है कि उन्हें पार्टी से स्थायी रूप से बाहर क्यों न किया जाए। यह कार्रवाई चुनाव के दौरान ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोपों पर आधारित है, जो पार्टी की एकजुटता को मजबूत करने का संकेत दे रही है। एक्स पर #BJPCleanUp ट्रेंड कर रहा, जहां कार्यकर्ता इसे ‘विजय के बाद अनुशासन’ बता रहे हैं।
रिजल्ट के 24 घंटे में BJP का ‘शो क्लीनअप’बिहार BJP के प्रदेश मुख्यालय प्रभारी अरविंद शर्मा ने शनिवार सुबह तीनों नेताओं के लिए अलग-अलग पत्र जारी किए। पत्रों में साफ लिखा है: “आपकी गतिविधियां पार्टी के हितों के विरुद्ध हैं, जो संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।” आरके सिंह को 6 साल का निष्कासन मिला, जबकि अग्रवाल दंपति को निलंबन – लेकिन तीनों को एक हफ्ते में स्पष्टीकरण देना होगा।
BJP हाईकमान ने इसे ‘चुनावी सफाई’ बताया, ताकि गठबंधन सरकार मजबूत बने। आरके सिंह का केस: 2013 में BJP जॉइन करने वाले सिंह (पूर्व गृह सचिव, मोदी सरकार में पावर मंत्री) ने लोकसभा 2024 में आरा से हार के बाद पार्टी और NDA पर हमले तेज कर दिए। उन्होंने बिहार सरकार पर 60,000 करोड़ के ‘घोटाले’ का आरोप लगाया, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू नेता अनंत सिंह की आलोचना की। चुनाव प्रचार के दौरान कानून-व्यवस्था पर चुनाव आयोग को भी घेरा।
पार्टी का कहना: “इन बयानों ने उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया।” सिंह ने हाल ही में जन सुराज के प्रशांत किशोर के बयानों का समर्थन भी किया, जो BJP को नागवार गुजरा।
अशोक अग्रवाल और उषा अग्रवाल: पति-पत्नी की जोड़ी ने कटिहार में पार्टी लाइन से हटकर काम किया। अशोक (एमएलसी) ने स्थानीय टिकट वितरण पर बगावत की धमकी दी, जबकि उषा (मेयर) ने BJP उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार किया। आरोप: “गठबंधन के खिलाफ बयानबाजी और वोट विभाजन की कोशिश।”
एक्स पर एक BJP कार्यकर्ता ने पोस्ट किया: “
चुनाव जीते, अब बागियों पर एक्शन! आरके सिंह का बाहर होना पार्टी के लिए अच्छा संदेश।” विपक्ष RJD ने इसे ‘आंतरिक कलह का सबूत’ बताया।क्यों लिया गया यह फैसला? चुनावी नुकसान से सबकBJP को बिहार में 89 सीटें मिलीं, लेकिन आरा, कटिहार जैसी सीटों पर बागियों के कारण नुकसान हुआ। 2020 में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई थी, जब कई नेता निष्कासित किए गए।
हाईकमान का मानना: “एकजुटता से ही 2026 बंगाल और 2027 यूपी में जीत संभव।” आरके सिंह जैसे बड़े चेहरे का राजपूत वोट बैंक था, लेकिन उनकी बगावत ने पार्टी को डराया। अब तीनों को जवाब न देने पर स्थायी निष्कासन का खतरा।