नई दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की करारी हार के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहली बार खुलकर मोर्चा खोला है। उन्होंने चुनाव परिणाम को ‘चौंकाने वाला’ बताते हुए कहा कि यह मुकाबला शुरू से ही निष्पक्ष नहीं था, जिसकी वजह से विपक्ष को जीत नसीब नहीं हुई। एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में राहुल ने कहा, “बिहार का यह परिणाम वाकई चौंकाने वाला है। हम एक ऐसे चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके, जो शुरू से ही निष्पक्ष नहीं था।” यह बयान एनडीए की शानदार जीत के ठीक बाद आया है, जब महागठबंधन को महज 35 सीटों पर सिमटना पड़ा, जबकि भाजपा अकेले 90 सीटों पर काबिज हो गई।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में बिहार के करोड़ों मतदाताओं का आभार जताया, जो महागठबंधन पर भरोसा करते रहे। लेकिन फिर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इस नतीजे की गहन समीक्षा करेंगे, ताकि लोकतंत्र बचाने के प्रयासों को और मजबूत किया जा सके। राहुल का यह बयान उनकी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ से जुड़ा लगता है, जो चुनाव से ठीक पहले सासाराम से शुरू हुई थी।
यात्रा के दौरान उन्होंने दावा किया था कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर वोटर लिस्ट से लाखों महागठबंधन समर्थकों के नाम काट रहे हैं। लेकिन नतीजों ने यात्रा को पूरी तरह विफल साबित कर दिया – यात्रा वाले जिलों में भी एनडीए ने भारी बहुमत हासिल किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी राहुल के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि वे उन ताकतों के खिलाफ लड़ते रहेंगे, जो संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को कमजोर कर रही हैं। जयराम रमेश जैसे वरिष्ठ नेता तो सीधे ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। एक एक्स पोस्ट में लिखा गया, “राहुल गांधी ने कहा – चुनाव शुरू से अनुचित था। यह लोकतंत्र पर हमला है।” लेकिन भाजपा ने इसे ‘हार का रोना’ बताते हुए खारिज कर दिया।
चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए को 202 सीटें मिलीं, जिसमें जेडीयू को 78 और भाजपा को 90 से अधिक सीटें हासिल हुईं। वहीं, महागठबंधन का स्कोर 35 पर अटक गया – आरजेडी को 23, कांग्रेस को मात्र 6 और अन्य सहयोगियों को बाकी। यह कांग्रेस का 2010 के बाद बिहार में सबसे खराब प्रदर्शन है, जब उन्हें सिर्फ 4 सीटें मिली थीं। राहुल ने चुनाव प्रचार में 25 जिलों का दौरा किया, गांवों में साइकिल चलाई, स्थानीय भाषा में बोले और युवाओं को जोड़ने की कोशिश की। लेकिन जातिगत समीकरण, विकास के मुद्दे और योगी आदित्यनाथ की रैलियों ने विपक्ष के प्रयासों पर पानी फेर दिया।
राहुल ने प्रचार के दौरान भागलपुर में कहा था, “हरियाणा की सरकार चोरी हुई है, बिहार में भी वोट चोरी हो रही है। नितीश, मोदी और शाह बिहार को मजदूर बनाने पर तुले हैं।” लेकिन जनता ने स्थिरता और समृद्धि को चुना। तेजस्वी यादव की ‘माई फॉर्मूला’ (महिला-युवा) भी फेल रही, जबकि पीएम मोदी ने इसे उल्टा ‘एमवाई’ (मुस्लिम-यादव) का तंज बनाकर पलट दिया। जन सुराज जैसी नई पार्टियां भी 1-2 सीटों पर सिमट गईं।
एनडीए की जीत पर पीएम मोदी ने दिल्ली में कार्यकर्ताओं से कहा, “बिहार की महिलाओं और युवाओं ने समृद्धि चुनी। जंगल राज की वापसी नहीं होगी।” योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट किया, “यह जीत विकास और कानून-व्यवस्था की है। विपक्ष का ‘SIR’ (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) थ्योरी फेल हो गया।”
भाजपा प्रवक्ता ने राहुल के बयान पर तंज कसा, “चुनाव हारने पर साजिश का रोना रोना नई बात नहीं। जनता ने फैसला सुना दिया।” एक एक्स पोस्ट में लिखा, “राहुल गांधी पहले से हार मान चुके थे, अब ‘चोरी’ का बहाना।” विपक्ष में हाहाकार मचा है। लालू परिवार सोच में डूबा, तेजस्वी सिर्फ रघोपुर से जीते। ओवैसी ने ‘आत्ममंथन’ की अपील की। राहुल की समीक्षा में क्या निकलेगा – वोटर लिस्ट की खामियां या रणनीति की नाकामी? विशेषज्ञों का मानना है कि यह हार 2027 यूपी चुनावों के लिए खतरे की घंटी है।