पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महिलाओं का वोट ही राजा बनाता है। नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए ने 201 सीटों पर कब्जा जमाकर ऐतिहासिक जीत हासिल की, जबकि महागठबंधन को महज 42 सीटें नसीब हुईं। विपक्ष की ‘बदलाव की हवा’ का दम तो फूला, लेकिन आधी आबादी ने नीतीश को फिर से गले लगा लिया।
रिकॉर्ड 67.13% वोटिंग में महिलाओं ने 71.78% हिस्सा लिया – पुरुषों के 62.98% से 8.8% ज्यादा! यह 1951 के बाद बिहार का सबसे ऊंचा टर्नआउट था, और इसमें महिलाओं की ‘चुप्पी’ ने सबको चौंका दिया।महिलाओं का ‘एम-फैक्टर’: 10 हजार की ‘गारंटी’ ने दिलाई जीतनीतीश कुमार ने दो दशक से महिलाओं को अपना ‘वोट बैंक’ बनाया है, लेकिन इस बार ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ ने कमाल कर दिया। चुनाव से ठीक पहले 1.41 करोड़ महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर हुए – कुल 14,100 करोड़ का खर्च!
यह सिर्फ पैसे का खेल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की कहानी बनी। ग्रामीण महिलाओं ने इसे ‘अपना हक’ माना, और वोटिंग में 2.52 करोड़ महिलाओं ने एनडीए को सपोर्ट किया। एक्जिट पोल्स में 45% महिलाओं ने एनडीए को चुना, जबकि महागठबंधन को 40% ही मिला।पुरानी योजनाओं का जादू: 2006 से चली ‘मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना’ ने लड़कियों की स्कूल जाने की दर 30% बढ़ाई।
जीविका प्रोजेक्ट के तहत 1.4 करोड़ महिलाएं ‘दीदियां’ बनीं, जो अब बिजनेस चला रही हैं। पंचायतों में 50% आरक्षण ने उन्हें लीडर बनाया। शराबबंदी ने घरों को सुरक्षित किया, और इस बार 35% सरकारी नौकरियों में महिलाओं को कोटा मिला – सिर्फ बिहारी महिलाओं के लिए!
विपक्ष की चूक: तेजस्वी यादव ने नौकरियां और ‘महिला की बात’ का वादा किया, लेकिन महिलाओं को ‘जंगल राज’ का डर ज्यादा खला। प्रियंका गांधी की रैलियां तो चलीं, लेकिन नीतीश की ‘डायरेक्ट बेनिफिट’ ने भारी पड़ दिया।
एक्स पर ट्रेंडिंग रहा: “नीतीश लाडले, महिलाएं राजकुमारी!”
बिहार चुनाव 2025: नीतीश कुमार फिर बने महिलाओं के लाडले, महिलाएं ने बदला बिहार चुनाव में खेल
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