पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन (MGB) को करारा झटका दिया है। शुरुआती रुझानों में ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन ने बहुमत पार कर लिया, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन बुरी तरह हताश नजर आ रहा है। 243 सीटों में बहुमत के लिए 122 जरूरी हैं, और NDA 180+ सीटों पर मजबूत बढ़त के साथ ‘क्लीन स्वीप’ की ओर अग्रसर है। नीतीश कुमार का 10वां कार्यकाल तय लग रहा है, लेकिन महागठबंधन के सहयोगी दलों का कमजोर प्रदर्शन गठबंधन की कमर तोड़ गया।
BJP: 80+ सीटों पर बढ़त (सबसे मजबूत प्रदर्शन)।
JDU: 84 सीटों पर बढ़त (नीतीश कुमार की पार्टी ने गठबंधन में बड़ा रोल निभाया)।
अन्य NDA सहयोगी (LJP, HAM): 20+ सीटें (चिराग पासवान की LJP ने 14 सीटें हासिल कीं)।
कुल NDA: 181+ (50% से ज्यादा वोट शेयर)।
महागठबंधन की हालत खराब:
RJD: 37-59 सीटों पर बढ़त (तेजस्वी यादव की पार्टी अकेले लड़ी, लेकिन उम्मीद से कम)।
कांग्रेस: 16 सीटें (2020 की तुलना में बेहतर, लेकिन अपेक्षाकृत कम)।
CPI(ML) और अन्य लेफ्ट: 6 सीटें (महागठबंधन का बैकबोन साबित नहीं हुआ)।
कुल MGB: 57-75 (2020 के 110 से ज्यादा पीछे)।
जन सुराज पार्टी (JSP) को 0-5 सीटें मिलीं, जो प्रशांत किशोर के लिए बड़ा झटका है। महिलाओं का 70%+ मतदान NDA के पक्ष में गया, जबकि मुस्लिम वोट (78%) महागठबंधन के साथ रहा, लेकिन OBC और SC वोटरों ने नीतीश को तरजीह दी।
सहयोगी दलों का फ्लॉप शो: महागठबंधन की हार का मुख्य कारण महागठबंधन की हार में सहयोगी दलों का कमजोर प्रदर्शन बड़ा रोल निभाया। तेजस्वी यादव ने रोजगार और बदलाव के मुद्दे पर जोर दिया, लेकिन:
कांग्रेस का खराब स्ट्राइक रेट: सिर्फ 16 सीटों पर बढ़त, जबकि 2020 में 19 थीं। बिहार कांग्रेस प्रमुख ने इसे “अप्रत्याशित” बताया। कई प्रमुख सीटों पर उम्मीदवारों की हार ने गठबंधन को कमजोर किया।
लेफ्ट पार्टियों (CPI-ML, CPI, CPM) की सीमित सफलता: मात्र 6 सीटें, जबकि ये दल मजदूर और किसान वोट बैंक के दम पर थे। CPI(ML) नेता दीपंकर भट्टाचार्य ने इसे “निराशाजनक” कहा, लेकिन RJD पर दोष डालने से बचा।
VIP का नुकसान: मुकेश साहनी की पार्टी ने कुछ सीटें लड़ीं, लेकिन कोई खास असर नहीं। कुल मिलाकर, सहयोगी दलों ने RJD को वो बूस्ट नहीं दिया, जो 2020 में मिला था। एक एनालिस्ट ने कहा, “सहयोगी दलों का वोट ट्रांसफर फेल हो गया, जिससे तेजस्वी का ‘नौकरी वाली सरकार’ का सपना चूर-चूर।”
नीतीश कुमार के NDA में सहयोगी मजबूत साबित हुए। LJP और HAM ने छोटी संख्या में लेकिन महत्वपूर्ण सीटें जीतीं, जो गठबंधन की एकजुटता दिखाती हैं।
नीतीश कुमार (JDU): “जनता ने विकास और सुषासन को चुना। हम 160+ सीटें जीतेंगे।” नीतीश ने सहयोगियों को धन्यवाद दिया और कहा कि महिलाओं की योजनाएं गेम चेंजर रहीं।
तेजस्वी यादव (RJD): अभी चुप्पी साधे हैं, लेकिन करीबी स्रोतों के अनुसार “गिनती पर नजर”। लालू प्रसाद ने कार्यकर्ताओं से “धैर्य” की अपील की। तेजस्वी की अपनी सीट रघोपुर पर बढ़त है, लेकिन गठबंधन की हार से निराशा साफ।