बीजेपी सांसद कंगना रनौत पर यूपी में चलेगा राष्ट्रद्रोह का मुकदमा, किसान आंदोलन पर विवादित बयान ने मचाया हंगामा!

आगरा : बीजेपी सांसद कंगना रनौत की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आगरा की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर राष्ट्रद्रोह की याचिका को स्वीकार कर लिया है। मामला 2020-21 के किसान आंदोलन पर कंगना के एक विवादित बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आंदोलन के दौरान ‘रेप और मर्डर’ होने का दावा किया था। कोर्ट के इस फैसले से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है, और विपक्ष ने बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के बाद वकील रमाशंकर शर्मा की रिवीजन याचिका को मंजूर करते हुए थाना न्यू आगरा पुलिस की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर दिया। अब कंगना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356 (राष्ट्रद्रोह) और 152 (सार्वजनिक शांति भंग करने) के तहत मुकदमा चलेगा। शर्मा ने सितंबर 2024 में यह याचिका दाखिल की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कंगना के बयान ने लाखों किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई और देश के अन्नदाताओं का अपमान किया।

कंगना ने अगस्त 2024 में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान किसान आंदोलन पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा, “किसान आंदोलन के दौरान रेप और मर्डर हुए थे। अगर तीन कृषि कानून वापस न होते, तो प्लानिंग लंबी चलती और पंजाब में बांग्लादेश जैसे हालात बन जाते।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और किसान संगठनों ने इसे ‘राष्ट्रविरोधी’ करार दिया। कंगना ने आंदोलनकारियों को ‘खालिस्तानी आतंकियों’ से भी जोड़ा था, जो पहले भी विवादों का कारण बना।

वकील रमाशंकर शर्मा, जो खुद एक किसान परिवार से हैं, ने कोर्ट में कहा, “मैं 30 साल तक खेती करता रहा हूं। कंगना ने न सिर्फ किसानों को बलात्कारी और हत्यारा कहा, बल्कि महात्मा गांधी के बलिदान का भी अपमान किया। यह राष्ट्रद्रोह है।” शर्मा ने पुलिस को शिकायत भेजी थी, लेकिन निचली अदालत ने पहले केस खारिज कर दिया था। अब स्पेशल कोर्ट ने इसे पुनर्जीवित कर दिया।
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यह मामला सियासत में गरमा गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने कंगना के बयान को ‘किसान-विरोधी’ बताते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। एसपी नेता अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “कंगना जैसी सांसदें किसानों का अपमान करती हैं, लेकिन मोदी सरकार चुप है।” वहीं, किसान यूनियन ने हापुड़ जैसे जिलों में कंगना का पुतला जलाया और बीजेपी से उन्हें बर्खास्त करने की मांग की।