श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में हाल ही में दिल्ली स्थित लाल किले के पास हुए ब्लास्ट केस से जुड़े संदिग्धों की 2 युवकों- उमर और आमिर को गिरफ्तारी के बाद उनके परिवारों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का दावा है कि उनके बेटों के नाम पर दर्ज हरियाणा नंबर की कोई गाड़ी नहीं है और वे कभी दिल्ली नहीं गए।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि जिनकी पहचान तारिक और उनके साथी के रूप में हो रही है – को रविवार रात को श्रीनगर के पास से हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना है कि ये युवक हरियाणा रजिस्टर्ड एक हुंडई i20 कार से जुड़े हैं, जो दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई थी। लेकिन परिवारों का आरोप है कि यह पूरी तरह गलतफहमी है।
तारिक के पिता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारा परिवार सालों से यहीं पहलगाम के पास रहता है। हमारे पास न तो कोई कार है, न ही हरियाणा का कोई कनेक्शन। बेटा कभी दिल्ली गया ही नहीं। ये सब झूठा इल्जाम लगाकर बेकसूर को फंसाने की साजिश लगती है।”
दिल्ली पुलिस के अनुसार, ब्लास्ट वाली कार गुरुग्राम के मोहम्मद सलमान के नाम पर रजिस्टर्ड थी, जिसे उन्होंने डेढ़ साल पहले ओखला के देवेंद्र को बेच दिया था। जांच में सामने आया कि कार बाद में जम्मू-कश्मीर के तारिक नामक व्यक्ति को ट्रांसफर हुई, जिसके बाद पुलवामा जैसे पुराने आतंकी घटनाओं से लिंक जोड़कर पूछताछ तेज हो गई। फरीदाबाद से गिरफ्तार एक महिला डॉक्टर शाहीना को भी जैश-ए-मोहम्मद के महिला विंग से जोड़ा जा रहा है, लेकिन युवकों के परिवार इससे इनकार कर रहे हैं।
यह मामला दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए धमाके से जुड़ा है, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हुए। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पूछताछ जारी है। दिल्ली, यूपी, बिहार समेत नौ राज्यों की टीमें भी इस केस में शामिल हो चुकी हैं।