नई दिल्ली :: हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी वह तिथि है जब भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इस दिन से शुभ-कार्य, विवाह, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य पुनः प्रारंभ होते हैं क्योंकि माना जाता है कि चातुर्मास की अवधि में देव की उपस्थिति कम रहती है परंतु इस साल की विशेषता यह है कि देवउठनी एकादशी के दिन स्वयं विवाह मुहूर्त नहीं माना गया है।
धार्मिकों के अनुसार इस साल 1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागेंगे और इसके बाद ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है. प्राप्त जानकारी के अनुसार हिंदू परंपरा में शुभ विवाह मुहूर्त की शुरुआत देवउठनी एकादशी से माना जाता है. लेकिन बता दें कि पिछले साल की तरह इस बार भी बड़ी ग्यारस पर शादियां नहीं होंगी. कहा जाता है कि ऐसा सूर्य के चाल के कारण हो रहा है. ऐसे में चलिए हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं विवाह के शुभ मुहूर्त के बारे में.
हिंदू पंचांग के अनुसार, 1 नवंबर 2025 शनिवार को देवउठनी ग्यारस आ रही है. ऐसे में शास्त्रों का कहना है कि इस दिन बिना किसी मुहूर्त के विवाह संपन्न हो जाता है. इसके साथ ही इस दिन से हरि सब्जियां, भाजी, बेर और मौसमी फलों में आंवला का सेवन किया जाने लगता है. वैसेतो हिंदू धर्म में विवाह के लिए कुंडली में सूर्य की चाल देखी जाती है. लेकिन इस बार ज्योतिषाचार्य पंडित के अनुसार देवउठनी एकादशी पर विवाह संपन्न नहीं हो सकती है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तब एक माह का कालखंड खरमास कहलाता है. इस अवधि को अशुभ महीना भी कहा जाता है. इस महीनें में विवाह, गृह प्रवेश या फिर कोई भी शुभ कार्य पूरा तरह से वर्जित होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय सूर्य देव के गुरु, बृहस्पति और अन्य ग्रहों की स्थिति शुभ फल नहीं देती.
किस दिन से शुरू होंगे विवाह?
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जैसे ही सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे उसी दिन से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य के द्वार खुल जाएंगे. इसलिए जिन लोगों ने विवाह की तिथि देवउठनी ग्यारस पर तय की थी उन्हें थोड़ा इंतजार करना होगा.