नई दिल्ली : आंवला नवमी 2025 का दिन धर्म, स्वास्थ्य और समृद्धि का संगम है। इस दिन श्रद्धा से आंवले के वृक्ष की पूजा करने से जीवन में अक्षय पुण्य और ईश्वरीय आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। यह पर्व हर आयु वर्ग के लिए सरल और पवित्र साधना का अवसर है। जहां प्रकृति, भक्ति और स्वास्थ्य एक सूत्र में बंध जाते हैं।
आंवला नवमी का दिन धन, आरोग्य और दीर्घायु का प्रतीक माना गया है। इस दिन आंवले के सेवन और पूजा से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है तथा पापों का क्षय होता है। यह दिन संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि और वैवाहिक सुख प्रदान करने वाला माना गया है।
इस दिन के विशेष उपायों के जरिए आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं और आंवला के अद्भुत लाभों का पूरा उपयोग कर सकते हैं।
- आंवले के पेड़ की पूजा: आंवले के पेड़ की जड़ में जल और थोड़ा कच्चा दूध अर्पित करें। हल्दी और कुमकुम से तिलक करें और घी का दीपक जलाएं।
- परिक्रमा और कलावा बांधना: पेड़ के चारों ओर लाल धागा 7, 9 या 11 बार बांधें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार 7, 9 या 108 बार परिक्रमा करें।
- मंत्र जाप: आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके ‘ॐ धात्र्यै नमः’ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- दान-पुण्य: इस दिन दान का अक्षय फल मिलता है। आंवला, पीले वस्त्र, हल्दी, गाय का घी या अनाज का दान करना शुभ माना जाता है।
- वृक्ष के नीचे भोजन: आंवले के पेड़ के नीचे ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को भोजन कराएं। फिर स्वयं भी परिवार सहित वहीं बैठकर भोजन करें। माना जाता है कि ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
- आंवले का सेवन: इस दिन आंवले का सेवन करना बहुत लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि इससे शरीर को आरोग्यता प्राप्त होती है।
- भगवान विष्णु को आंवला अर्पण: इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और उन्हें आंवला फल अर्पित करें। इससे श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।