पटना: लोक आस्था के पर्व छठ का आज तीसरा दिन है. आज डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. कल उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन हो जाएगा. सूर्य की उपासना और 36 घंटों के सबसे कठिन निर्जला व्रत के तप का एक अनूठा संगम है.
छठ पूजना का शुभ मुहूर्त: सूर्य की उपासना और 36 घंटों के सबसे कठिन निर्जला व्रत के तप का एक अनूठा संगम है. चार दिनों तक चलने वाला यह अनुष्ठान पीढ़ी-दर-पीढ़ी और भी भव्य और विस्तृत होता जा रहा है लेकिन इसकी आत्मा आज भी उतनी ही सात्विक और पवित्र है. उन्होंने बताया कि आज पहला अर्ध्य शाम 5:30 से शुरू होगा और उगते सूर्य को पारण के दिन सुबह 6:20 से 25 के बीच सूर्योदय होगा.
पहला दिन: नहाय-खाय: छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है. इस दिन व्रती (व्रत रखने वाले) नदी, तालाब या पवित्र जल में स्नान करते हैं और पूरी तरह से सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं. इस दिन विशेष रूप से कद्दू (लौकी) की सब्जी, चने की दाल और चावल (अरवा चावल) बनाया जाता है.
दूसरा दिन: खरना: नहाय-खाय के अगले दिन खरना होता है, जिसे लोहंडा भी कहा जाता है. इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद विशेष प्रसाद बनाते हैं. यह प्रसाद मिट्टी के नए चूल्हे पर, आम की लकड़ी जलाकर और पूरी पवित्रता के साथ बनाया जाता है. इसमें गुड़ की खीर (रसियाव) और रोटी प्रमुख होती है. व्रती इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं, जिसके बाद उनका 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है.
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य: यह छठ महापर्व का मुख्य दिन होता है. इस दिन व्रती अपने पूरे परिवार के साथ घाट पर जाते हैं. बांस की टोकरी (दउरा) में ठेकुआ, मौसमी फल, सब्जियां और पूजा की अन्य सामग्री सजाकर सिर पर रखकर घाट तक ले जाया जाता है. व्रती पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य (अस्ताचलगामी सूर्य) को अर्घ्य देते हैं.
चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण: चौथे और अंतिम दिन, व्रती सूर्योदय से पहले ही घाट पर पहुंच जाते हैं और पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य की प्रतीक्षा करते हैं. सूर्य की पहली किरण के साथ ही उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और छठी मैया से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की जाती है. अर्घ्य देने के बाद व्रती अदरक और जल या शरबत से अपना 36 घंटे का कठिन व्रत तोड़ते हैं, जिसे पारण कहा जाता है.