बिहार में दोस्ताना मुकाबला: महागठबंधन की आपसी फाइट… इन सीटों पर कांग्रेस-RJD, VIP और CPI आमने-सामने

बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे महागठबंधन के भीतर सीटों को लेकर असमंजस और प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है. कई विधानसभा क्षेत्रों में सहयोगी दल एक-दूसरे के आमने-सामने हैं, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं.

राजद, कांग्रेस, वाम दल और वीआईपी के बीच सीटों के तालमेल की कोशिशें भले हो चुकी हों, लेकिन जमीनी स्तर पर समीकरण कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. कई जगहों पर दोस्ताना मुकाबला बन गया है, जहां महागठबंधन के घटक दल एक-दूसरे को सीधे चुनौती दे रहे हैं.

सबसे दिलचस्प स्थिति वारिसलीगंज, नरकटियागंज, कहलगांव, सुल्तानगंज, वैशाली और सिकंदरा जैसी सीटों पर बनी है. इन इलाकों में राजद और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. उदाहरण के लिए वारिसलीगंज से राजद ने अनीता देवी महतो को उम्मीदवार बनाया है, तो वहीं कांग्रेस ने सतीश कुमार को टिकट दिया है. इसी तरह नरकटियागंज में राजद के दीपक यादव का मुकाबला कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय से होगा.

कहलगांव में राजद के रजनीश भारती और कांग्रेस के प्रवीण सिंह कुशवाहा आमने-सामने हैं. सुल्तानगंज में भी चंदन सिन्हा (राजद) और ललन कुमार (कांग्रेस) के बीच दिलचस्प टक्कर देखने को मिलेगी. वहीं वैशाली सीट पर राजद के अजय कुशवाहा और कांग्रेस के ई. संजीव सिंह के बीच सीधा मुकाबला रहेगा. सिकंदरा सीट पर दोनों दलों के अनुभवी नेता राजद के उदय नारायण चौधरी और कांग्रेस के विनोद चौधरी एक-दूसरे से चुनावी जंग लड़ रहे हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन सीटों पर महागठबंधन के भीतर की प्रतिस्पर्धा विपक्षी गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है. जहां भाजपा और जदयू ने उम्मीदवार चयन में सख्त तालमेल रखा है, वहीं महागठबंधन की यह “दोस्ताना लड़ाई” कई सीटों पर सत्तारूढ़ एनडीए के लिए फायदा साबित हो सकती है.