नई दिल्ली :छठ पूजा का व्रत मनोकामना पूर्ति करने वाला सबसे उत्तम व्रत माना जाता है। छठ पूजा के दिन छठी मईया और सूरज देवता की पूजा का विधान है। छठी मैया सूर्य देवता की बहन हैं, इसलिए छठ पर्व में सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इस व्रत की शुरुआत शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन होता है और इसका समापन सप्तमी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद होता है।
इस व्रत को अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर करते हैं. इस व्रत को पूरा करने वाले लोगों को कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है. वहीं कई ऐसी महिलाएं हैं जो संतान की प्राप्ति चाहती हैं. वह महिलाएं अगर छठ पूजा में यह उपाय कर लें तो उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण हो जाएंगी.
छठ पूजा के खास उपाय)
निर्जला व्रत
छठ पूजा का व्रत महिलाओं के द्वारा निर्जला रहकर किया जाता है। ये व्रत पूरे 36 घंटे तक बिना जल ग्रहण किये करना होता है। छठ पूजा का निर्जला व्रत रखने से महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से शारीरिक बल का भी परीक्षण होता है।
तांबे लौटे में अर्घ्य : छठ पूजा के दिन ढलते सूर्य को तांबे के लौटे में अर्घ्य अर्पित करने से और अगले दिन सुबह अर्घ्य के समय जल अर्पित करने से संतान प्राप्ति की प्रार्थना करें तो इससे संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है।
गेहूं और गुड़ का दान : छठ पूजा के दिन महिलाएं लाल कपड़े में गेहूं और गुड़ को बांधकर गरीबों में दान करें। ऐसा करने से व्रती की सारी इच्छाओं की पूर्ति होती है।