जलवायु संकट दुनिया भर में भीषण आग को बढ़ावा दे रहा ! हर साल बढ़ेंगे 57 अत्यधिक गर्म दिन

मेलबर्न : पृथ्वी के फेफड़े कहलाने वाले अमेज़न के घने जंगलों से उठते धुएं की भयावह तस्वीरें हम सभी ने देखी हैं। स्पेन के अग्निशामक खेत में लगी आग से जूझ रहे हैं। लॉस एंजिलिस में मशहूर हस्तियों के घर धुएं से काले पड़ गए हैं और ऑस्ट्रेलिया के कुछ शहर धुएं से भरे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण जंगल की आग, बुशफायर और अत्यधिक गर्मी जैसी प्राकृतिक आपदाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। अमेज़न और कांगो के वनों से लेकर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के शहरों तक, जलवायु संकट के दावे सबके सामने हैं।

मेलबर्न विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शोध अध्येता हैमिश क्लार्क के अनुसार, पिछले वर्ष दुनिया भर में लगभग 37 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जंगल की आग से प्रभावित हुआ। इसके कारण 10 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए और 215 अरब अमेरिकी डॉलर के घर और बुनियादी ढांचा खतरे में पड़े।

ऑस्ट्रेलिया में बुशफ़ायर ने पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में लाखों हेक्टेयर भूमि को जला दिया, जबकि अमेरिका के लॉस एंजिलिस में असामान्य रूप से नम मौसम और गर्म जनवरी ने आग की तीव्रता को बढ़ाया। दक्षिण अमेरिका के पैंटानल-चिकिटानो क्षेत्र में आग का प्रभाव 35 गुना अधिक रहा।

जलवायु वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि जारी रही, तो आग और गर्मी की घटनाएं और भी अधिक भीषण होंगी। उन्होंने आग से निपटने के लिए स्थानीय और क्षेत्रीय ज्ञान, प्रभावी वन प्रबंधन, घरों की तैयारी और आपदा प्रबंधन को जरूरी बताया।

दुनिया को हर साल लगभग 57 अतिरिक्त “अत्यधिक गर्म” दिनों का सामना करना पड़ेगा। इसका सबसे अधिक असर छोटे और गरीब देशों पर होगा, जबकि अमेरिका, चीन और भारत जैसे बड़े उत्सर्जक देशों को अपेक्षाकृत कम असर झेलना पड़ेगा।