कानपुर देहात ( तहसील अकबरपुर)
कहते हैं “रस्सी टूट गई, पर ऐंठन नहीं गई” — कुछ ऐसा ही दृश्य अकबरपुर तहसील क्षेत्र में देखने को मिला, जहाँ पूर्व सपा शासनकाल जैसी मानसिकता वाले कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जे की घटनाएँ दोहराई जा रही हैं।
पूर्व सपा सरकार के समय जहाँ लूट, मारपीट और जबरन कब्जों की घटनाएँ आम थीं, वहीं अब वर्तमान में भी कुछ लोग उसी प्रवृत्ति को दोहराने से बाज नहीं आ रहे हैं। परंतु यह ध्यान देने योग्य है कि अब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है, जिसने स्पष्ट रूप से कहा है कि अवैध कब्जा करने वालों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई स्थान नहीं है।
मामले का विवरण
ग्राम नाही ज्युनिया निवासी प्रधान राकेश कुमार यादव एवं उनके भाई सर्वेश कुमार यादव पर आरोप है कि उन्होंने तहसील अकबरपुर, जिला कानपुर देहात के गाटा संख्या 599, मौजा 12, जो अकबरपुर-बारा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है, की भूमि पर अतिक्रमण किया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उक्त गाटा संख्या में एक चकरोड (ग्रामीण सार्वजनिक मार्ग) मौजूद था, जो चकबंदी के समय से ही राजस्व नक्शे में दर्ज है। आरोप है कि प्रधान राकेश कुमार यादव एवं उनके भाई ने संबंधित लेखपाल की मिलीभगत से इस चकरोड पर कब्जा करते हुए वहाँ प्लॉटिंग कर भूमि का विक्रय कर दिया है।
इसका प्रमाण स्वरूप नक्शे का चित्र भी उपलब्ध है, जिसमें स्पष्ट रूप से चकरोड का अस्तित्व दर्शाया गया है।
ग्रामीणों की समस्या
अब प्रश्न यह उठता है कि यदि वास्तव में चकरोड पर कब्जा कर लिया गया है, तो उन किसानों के लिए क्या व्यवस्था की गई है जिनके खेत राकेश कुमार यादव की भूमि के पीछे स्थित हैं? आखिर वे अपने खेतों तक पहुँचेंगे कैसे?
जिम्मेदार अखबार की मांग एक जिम्मेदार समाचार माध्यम होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। अतः हम स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों से निम्न बिंदुओं पर ठोस कार्यवाही की अपेक्षा करते हैं:
- यदि राकेश कुमार यादव व सर्वेश कुमार यादव दोषी पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध कठोर न्यायिक कार्यवाही की जाए।
- जिन राजस्व अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत से यह घटना संभव हुई, उनके विरुद्ध भी प्रशासनिक कार्यवाही की जाए।
- यदि यह आरोप असत्य साबित होते हैं, तो प्रशासन यह स्पष्ट करे कि राकेश कुमार यादव की भूमि के पीछे स्थित किसानों के खेतों तक पहुँचने की वैकल्पिक व्यवस्था क्या है।