नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में एक बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। साल 2026 में राज्यसभा की 72 सीटों पर होने वाले चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण होने वाली है। ताजा आंकड़ों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनावी चक्र के बाद देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यसभा के भीतर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व शून्य हो सकता है।
17 राज्यों से ‘गायब’ होगी कांग्रेस?
विधानसभाओं में सीटों की कम संख्या के कारण कांग्रेस कई राज्यों से अपने सांसद उच्च सदन भेजने की स्थिति में नहीं है।
इन राज्यों में संकट: उत्तर प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में कांग्रेस की मौजूदगी राज्यसभा में नाममात्र की रह जाएगी या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
दिग्गजों की विदाई: इस साल कांग्रेस के कई बड़े चेहरे जैसे मल्लिकार्जुन खड़गे, दिग्विजय सिंह और अभिषेक मनु सिंघवी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। हालांकि इनमें से कुछ की वापसी संभव है, लेकिन पार्टी की कुल ताकत में बड़ी गिरावट आने के संकेत हैं।
बीजेपी और एनडीए का ‘कमाल’एक तरफ कांग्रेस सिमट रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए अपने अब तक के सबसे मजबूत आंकड़े की ओर बढ़ रहे हैं।
बहुमत के करीब: बीजेपी इस वक्त राज्यसभा में 100 से अधिक सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। 2026 के अंत तक एनडीए की ताकत 123 (बहुमत का आंकड़ा) के और करीब पहुंच सकती है।
फायदा कहाँ? उत्तर प्रदेश, बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में बीजेपी को अतिरिक्त सीटें मिलने की उम्मीद है, जिससे बिल पास कराने में सरकार को और आसानी होगी।
क्यों बदल रहे हैं समीकरण?
राज्यसभा सीटों का गणित राज्यों की विधानसभा सीटों पर निर्भर करता है। पिछले दो सालों में कई राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, हरियाणा, और राजस्थान) में बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन और विपक्षी दलों में हुई टूट ने उच्च सदन का समीकरण पूरी तरह बदल दिया है।