लखनऊ : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति में जमीन-आसमान का अंतर करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बीजेपी अब ‘ट्राएंगल मॉडल’ पर काम कर रही है, जिसका सीधा असर संगठन की कार्यप्रणाली पर दिख रहा है। महाराजगंज से सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के कार्यालय में हाल ही में हुआ बदलाव इस नई रणनीति का जीता-जागता उदाहरण है।
क्या है बीजेपी का ‘ट्राएंगल मॉडल’?
बीजेपी का यह नया मॉडल तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है: कार्यकर्ता, संवाद और सुलभता। * इस मॉडल के तहत नेताओं और जनता/कार्यकर्ताओं के बीच की भौतिक और मानसिक दूरियों को खत्म करना प्राथमिकता है।
पंकज चौधरी के कार्यालय से क्यों हटीं मेजें?
महाराजगंज में केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी के कार्यालय से मेजें (Tables) हटाने की खबर ने सबको चौंका दिया है। इसके पीछे का उद्देश्य बेहद खास है:
दूरी कम करना: मंत्री और कार्यकर्ता के बीच रखी मेज एक ‘बाधा’ की तरह देखी जा रही थी। अब केवल कुर्सियां लगाई गई हैं ताकि मंत्री और जनता एक ही स्तर पर बैठकर बात कर सकें।
समानता का संदेश: मेज हटने से कार्यालय का माहौल ‘अधिकारी-कर्मचारी’ जैसा न लगकर ‘परिवार’ जैसा नजर आता है।
त्वरित निस्तारण: मेज पर फाइलों का अंबार लगाने के बजाय अब सीधे बातचीत और समस्याओं के तत्काल समाधान पर जोर है।
चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को साधने की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों में कार्यकर्ताओं की ‘अनदेखी’ की शिकायतों के बाद बीजेपी आलाकमान ने यह सख्त निर्देश दिए हैं।