बिहार में ‘UP मॉडल’ लागू: खुले में मांस बेचने पर ₹5,000 तक का जुर्माना, नीतीश सरकार की नई गाइडलाइन

पटना: बिहार सरकार ने राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मांस की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में खुले में मांस या मछली बेचना अपराध माना जाएगा। स्वास्थ्य, स्वच्छता और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है।

सरकार की 5 सबसे बड़ी शर्तें
काला शीशा या पर्दा अनिवार्य: अब मांस की दुकानों के सामने काला शीशा या गहरा पर्दा लगाना अनिवार्य होगा। दुकान के अंदर कटता हुआ या टंगा हुआ मांस बाहर से राहगीरों को दिखाई नहीं देना चाहिए।

लाइसेंस है जरूरी: बिना वैध लाइसेंस के कोई भी दुकानदार मांस की बिक्री नहीं कर पाएगा। अवैध दुकानों को तुरंत बंद करने और सील करने के निर्देश दिए गए हैं।

धार्मिक स्थलों और स्कूलों से दूरी: मंदिर, मस्जिद या स्कूल के पास मांस की दुकानें नहीं खोली जा सकेंगी। जो दुकानें पहले से ऐसी जगहों पर हैं, उन्हें शिफ्ट करने का आदेश दिया जा सकता है।

कचरा प्रबंधन: मांस के अवशेष (हड्डियां और गंदगी) खुले में फेंकना वर्जित है। दुकानदारों को इसे डस्टबिन में इकट्ठा करना होगा ताकि नगर निगम की गाड़ियां उसका निस्तारण कर सकें।

खुले में प्रदर्शन पर रोक: सड़क किनारे खुलेआम मांस लटकाकर प्रदर्शित करना अब पूरी तरह प्रतिबंधित है।

कितना लगेगा जुर्माना?

जुर्माना: नियमों का पहली बार उल्लंघन करने पर ₹5,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

सख्त कार्रवाई: यदि दुकानदार बार-बार नियमों को तोड़ता है, तो उसका ट्रेड लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और दुकान को स्थायी रूप से सील कर दिया जाएगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, दरभंगा और अन्य शहरों से यह शिकायतें आ रही थीं कि खुले में मांस बिकने और गंदगी के कारण लोगों को उस रास्ते से गुजरने में दिक्कत होती है। साथ ही, खुले में मांस पर बैठने वाली धूल और मक्खियां बीमारियों का कारण बनती हैं।