वक्त का फेर: कभी ‘गरीबों का खाना’ थीं ये चीजें, आज बन चुकी हैं ‘शाही भोजन’ और स्टेटस सिंबल

नई दिल्ली: कहते हैं कि समय का पहिया कब घूम जाए, कोई नहीं जानता। यह बात सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की चीजों पर भी लागू होती है। इतिहास गवाह है कि कई ऐसी चीजें जिन्हें कभी मजबूरी में ‘गरीबों का खाना’ माना जाता था, आज वो दुनिया के सबसे महंगे और लग्जरी होटलों के मेन्यू कार्ड की शोभा बढ़ा रही हैं।

  1. बाजरा और रागी (मिलेट्स)
    कुछ दशक पहले तक बाजरा, रागी और ज्वार जैसे मोटे अनाजों को ‘पिछड़ा’ खाना माना जाता था। लोग गेहूं और चावल को अमीरी की निशानी मानते थे। लेकिन आज ‘Superfood’ के नाम पर यही बाजरा और रागी फाइव स्टार होटलों में भारी कीमतों पर बेचे जा रहे हैं। फिट रहने के शौकीन लोग अब गेहूं छोड़ इन्हीं मोटे अनाजों की ओर भाग रहे हैं।
  2. मशरूम (Mushroom)
    पुराने समय में मशरूम को ‘सांप की छतरी’ कहकर उपेक्षित किया जाता था और इसे केवल वही लोग खाते थे जिनके पास खेती की जमीन या अनाज खरीदने के पैसे नहीं होते थे। आज मशरूम की कुछ प्रजातियां (जैसे गुच्छी मशरूम) हजारों और लाखों रुपये किलो बिकती हैं और इसे बेहद शाही माना जाता है।
  3. लोबस्टर (Lobster)
    हैरानी की बात है कि 18वीं सदी में अमेरिका में लोबस्टर इतना सस्ता और आम था कि इसे ‘समुद्र का चूहा’ कहा जाता था। इसे केवल कैदियों और गरीब मजदूरों को खिलाया जाता था। आज लोबस्टर दुनिया के सबसे महंगे सी-फूड में से एक है, जिसे खाना रईसी की पहचान माना जाता है।
  4. सत्तू (Sattu)
    बिहार और यूपी में ‘गरीबों का प्रोटीन’ कहा जाने वाला सत्तू अब ग्लोबल हो चुका है। पहले इसे मजदूर वर्ग अपनी भूख मिटाने के लिए पीता था, लेकिन अब जिम जाने वाले युवाओं और डाइटिशियन की पहली पसंद बन गया है। अब यह ‘देसी हॉर्लिक्स’ के नाम से महंगे आउटलेट्स पर बिक रहा है।
  5. क्विनोआ (Quinoa)
    दक्षिण अमेरिका में क्विनोआ को कभी जानवरों का चारा और बेहद गरीब लोगों का मुख्य भोजन माना जाता था। लेकिन जब इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू का पता चला, तो यह रातों-रात दुनिया का सबसे महंगा अनाज बन गया।