लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज विधान परिषद् में संबोधन के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा रुख अख्तियार किया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के कुछ सदस्यों की बयानबाजी और व्यवहार पर निशाना साधते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्र के प्रतीकों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें:
मुख्यमंत्री ने सदन के पटल पर खड़े होकर देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का जिक्र करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:
राष्ट्रभक्ति सर्वोपरि: सीएम योगी ने कहा, “‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वाधीनता संग्राम का उद्घोष है। इसका अपमान करना सीधे तौर पर उन महान क्रांतिकारियों और राष्ट्र का अपमान करने जैसा है जिन्होंने देश के लिए अपना बलिदान दिया।”
संवैधानिक मर्यादा: उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग संविधान की शपथ लेकर सदन में बैठते हैं, उन्हें संवैधानिक प्रतीकों और राष्ट्रीय गौरव का सम्मान करना ही होगा।
तुष्टिकरण पर हमला: बिना नाम लिए विपक्ष पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग ‘वोट बैंक’ और ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति के चक्कर में राष्ट्रगीत का विरोध करने का दुस्साहस करते हैं, जो अत्यंत निंदनीय है।
क्यों गरमाया मामला?
सदन में चर्चा के दौरान जब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान का विषय उठा, तो कुछ सदस्यों के पुराने बयानों और आचरण को लेकर बहस छिड़ गई। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने अपना रुख साफ किया।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: सीएम ने याद दिलाया कि ‘वंदे मातरम’ ने गुलामी की बेड़ियों को काटने की शक्ति दी थी और आज के भारत में इसे विवादास्पद बनाना संकुचित मानसिकता का परिचायक है।