अखिलेश का मास्टरस्ट्रोक: दिग्गज मुस्लिम चेहरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी थामेंगे सपा का हाथ, बसपा-कांग्रेस को झटका।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने कुनबे को बढ़ाने और ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा दांव खेला है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कभी कद्दावर स्तंभ रहे और हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। उनके साथ ही पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू भी अखिलेश यादव के नेतृत्व में आस्था जताते हुए सपा का दामन थामेंगे।

15 फरवरी को होगा आधिकारिक मिलन
सूत्रों और हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीमुद्दीन सिद्दीकी और अनीस अहमद ‘फूल बाबू’ 15 फरवरी को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं मौजूद रहेंगे। चर्चा यह भी है कि उनके साथ कई पूर्व विधायक और सैकड़ों समर्थक भी सपा में शामिल होंगे।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर

बसपा के ‘मिनी मुख्यमंत्री’: एक दौर में नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मायावती के बाद बसपा का सबसे ताकतवर नेता माना जाता था। 2007-2012 की बसपा सरकार में उनके पास पीडब्ल्यूडी, आबकारी और ऊर्जा जैसे भारी-भरकम विभाग थे।

कांग्रेस से मोहभंग: 2017 में बसपा से निष्कासित होने के बाद वह 2018 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। हालांकि, बीते 24 जनवरी 2026 को उन्होंने यह कहते हुए कांग्रेस छोड़ दी कि वहां जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए काम करने की गुंजाइश कम हो गई है।

क्यों अहम है यह ‘जॉइनिंग’?

अखिलेश यादव के लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी और फूल बाबू का साथ आना पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के मुस्लिम मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश देने की कोशिश है। सिद्दीकी की पकड़ विशेष रूप से मुस्लिम और दलित गठजोड़ पर मानी जाती रही है।

‘सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुटता’

कांग्रेस छोड़ने के बाद सिद्दीकी ने संकेत दिया था कि वह ऐसी ताकतों के साथ जाएंगे जो सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ मजबूती से लड़ रही हैं। उन्होंने हाल ही में अखिलेश यादव की कार्यशैली की भी सराहना की थी, जिससे उनके सपा में जाने की अटकलें पहले ही तेज हो गई थीं।