कानपुर: बैंक हड़ताल से ₹325 करोड़ की क्लीयरिंग फंसी, केंद्रीय कार्यालयों में भी कामकाज ठप

कानपुर : औद्योगिक नगरी कानपुर में केंद्रीय श्रम संगठनों और बैंक यूनियनों के आह्वान पर की गई हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। गुरुवार को हुई इस हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं, जिससे अकेले कानपुर में लगभग ₹325 करोड़ की चेक क्लीयरिंग बीच में ही लटक गई।

आर्थिक लेनदेन पर पड़ा भारी असर
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के अनुसार, हड़ताल की वजह से बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग ₹1600 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल नहीं थे, लेकिन अन्य सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में ताले लटके रहने के कारण आम जनता और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

केंद्रीय कार्यालयों में भी सन्नाटा
हड़ताल का असर सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं रहा। शहर स्थित विभिन्न केंद्रीय सरकारी कार्यालयों में भी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

मुख्य मांगें और विरोध का कारण

यूनियन नेताओं (जैसे रजनीश गुप्ता और अंकुर द्विवेदी) के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों को लेकर था:
5-डे बैंकिंग: बैंक कर्मचारी लंबे समय से सप्ताह में केवल 5 दिन काम करने की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं।
लेबर कोड का विरोध: नए श्रम कानूनों (Labour Codes) को कर्मचारी विरोधी बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग।
पेंशन और वेतन विसंगतियां: पुरानी पेंशन योजना की बहाली और अन्य लंबित वित्तीय मांगों पर दबाव।

जनता को हुई असुविधा
हड़ताल के चलते एटीएम में कैश की किल्लत और बैंकों में चेक जमा न हो पाने के कारण छोटे व्यापारियों का भुगतान फंस गया। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।