“गाइडलाइंस पर भड़के सपा नेता एसटी हसन, बोले—किसी पर जबरन कुछ थोपना लोकतंत्र के खिलाफ।”

मुरादाबाद : उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर हाल ही में जारी हुई गाइडलाइंस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत नहीं कर सकते और वंदे मातरम् का गायन उनके धार्मिक विश्वासों के विपरीत है।

क्या कहा एसटी हसन ने?

मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. हसन ने तर्क दिया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ हर किसी को अपने धर्म का पालन करने की आजादी है। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

धार्मिक मान्यता: उन्होंने कहा, “हमारे मजहब (इस्लाम) में सिर्फ एक खुदा की इबादत की इजाजत है। हम वतन से मोहब्बत करते हैं, लेकिन उसकी पूजा नहीं कर सकते।”

जबरदस्ती का विरोध: पूर्व सांसद ने कहा कि देशभक्ति साबित करने के लिए किसी विशेष गीत को गाने के लिए मजबूर करना सही नहीं है।

संवैधानिक अधिकार: उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब किसी की आस्था का फैसला सरकारी गाइडलाइंस से होगा?

क्या है विवाद की जड़?

हाल ही में कुछ संस्थाओं और क्षेत्रों में ‘वंदे मातरम्’ के अनिवार्य गायन या उसे लेकर विशेष दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए गए हैं। इसी को लेकर विपक्षी नेताओं और विशेषकर मुस्लिम धर्मगुरुओं की ओर से विरोध के स्वर उठने लगे हैं।

सियासी घमासान और प्रतिक्रियाएं

एसटी हसन के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है:
बीजेपी का रुख: भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस बयान को ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार दिया है। बीजेपी का कहना है कि वंदे मातरम् राष्ट्र का सम्मान है और इसे मजहब से जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सोशल मीडिया पर बहस: सोशल मीडिया पर भी लोग दो धड़ों में बँटे नजर आ रहे हैं; जहाँ एक पक्ष इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे राष्ट्रवाद का अपमान मान रहा है।