नई दिल्ली: पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की बहुचर्चित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर जारी विवाद के बीच पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। पब्लिकेशन हाउस ने साफ किया है कि फिलहाल इस किताब की एक भी कॉपी बाजार में नहीं छपी है और न ही इसे रिलीज किया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब किताब के कुछ अंश मीडिया में लीक हो गए। इन अंशों में मुख्य रूप से अग्निपथ योजना की शुरुआत और साल 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ हुए गतिरोध (Galwan Clash) के दौरान सरकार और सेना के बीच हुए संवाद का जिक्र था। इन संवेदनशील खुलासों के कारण रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने किताब की समीक्षा की बात कही थी।
पब्लिकेशन हाउस का स्पष्ट रुख
विवाद और किताब पर रोक की अटकलों के बीच पेंगुइन की ओर से यह बयान सामने आया है:
प्रकाशन की स्थिति: पब्लिशर के अनुसार, किताब अभी प्रकाशन की प्रक्रिया (In-process) में है।
सफाई: “बाजार में किताब की प्रतियां उपलब्ध होने की खबरें गलत हैं। अभी तक कोई भी फिजिकल कॉपी प्रिंट नहीं की गई है।”
समीक्षा प्रक्रिया: सूत्रों के अनुसार, सेना और रक्षा मंत्रालय के पास किताब की पांडुलिपि (Manuscript) समीक्षा के लिए है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसमें कोई गोपनीय सुरक्षा जानकारी साझा न की गई हो।
विपक्ष के निशाने पर सरकार
इस देरी और विवाद को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार जनरल नरवणे के संस्मरणों के माध्यम से ‘अग्निपथ योजना’ और ‘चीन विवाद’ पर अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश कर रही है।
जनरल नरवणे का पक्ष
पूर्व सेना प्रमुख ने अभी तक इस देरी पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि जब तक रक्षा मंत्रालय की ओर से हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक पाठकों को इस किताब के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।