नई दिल्ली: संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में आज उस समय अराजकता की स्थिति पैदा हो गई, जब विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सदन के बीचों-बीच (वेल में) आकर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। देखते ही देखते विरोध इतना उग्र हो गया कि कुछ सांसदों ने प्रधानमंत्री की कुर्सी के करीब जाने का प्रयास किया, वहीं कुछ अन्य सदस्य स्पीकर की मेज तक जा पहुंचे।
सदन की गरिमा पर उठे सवाल
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। गतिरोध तब चरम पर पहुँच गया जब विपक्षी दल के कुछ सांसद सुरक्षा घेरे को लांघते हुए अध्यक्ष (स्पीकर) की टेबल के पास पहुँच गए। इस दौरान कागजात फाड़े गए और सदन की मर्यादा के विपरीत आचरण देखा गया। हंगामे को देखते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
BJP महिला सांसदों का मोर्चा
इस घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला सांसदों ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और इस अशोभनीय व्यवहार की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
महिला सांसदों की मुख्य मांगें:
सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले सांसदों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
हुड़दंग करने वाले सदस्यों को सदन से निलंबित किया जाए।
सदन में सुरक्षा मानकों और व्यवहारिक नियमों की समीक्षा की जाए।
सरकार बनाम विपक्ष
जहाँ एक तरफ भाजपा इसे “लोकतंत्र का काला दिन” बता रही है, वहीं विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है और उनकी आवाज़ दबाई जा रही है।
“संसद संवाद का स्थान है, हंगामे का नहीं। स्पीकर की टेबल पर चढ़ना और प्रधानमंत्री की गरिमा का अपमान करना संसदीय इतिहास के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।”