लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों का गुस्सा अब सीमा पार कर गया है! विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि केंद्र सरकार के इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और बिजली क्षेत्र के बड़े पैमाने पर निजीकरण के खिलाफ अगर संसद में कोई कदम उठाया गया, तो देशव्यापी हड़ताल और जन आंदोलन होगा।
सबसे चौंकाने वाली बात – इस आंदोलन में 25 करोड़ से अधिक किसान, मजदूर, बिजली कर्मचारी और अभियंता शामिल होंगे! यूपी को इसकी शुरुआत का केंद्र माना जा रहा है, जहां पहले से ही प्रदर्शन, धरने और रैलियां चल रही हैं। किसान संगठनों (जैसे संयुक्त किसान मोर्चा) का खुला समर्थन मिलने से यह आंदोलन अब सिर्फ बिजली विभाग तक सीमित नहीं रहा – यह पूरे देश के जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ बड़ा जन-संघर्ष बन रहा है।
क्यों है इतना गुस्सा?
- बिजली के निजीकरण से उपभोक्ताओं पर बिल बढ़ने का डर
- सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियों का निजी हाथों में जाना
- स्मार्ट मीटर और अन्य सुधारों से कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में
- किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली मिलने पर असर
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर बजट सत्र में यह बिल पेश या पारित हुआ, तो उसी दिन से काम बंद और सड़कों पर बड़ा प्रदर्शन होगा। यूपी में पहले ही गोरखपुर, संत कबीर नगर, लखनऊ समेत कई जिलों में धरने और रोड जाम हो चुके हैं।
ट्रेड यूनियनों का कहना है – “यह अब केवल बिजली कर्मियों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश के किसान-मजदूर का संघर्ष है।” आने वाले दिनों में 12 फरवरी जैसी तारीखों पर और बड़े एक्शन की तैयारी है।
अगर आप यूपी में हैं, तो बिजली सेवाओं में संभावित व्यवधान के लिए तैयार रहें। क्या लगता है, सरकार इस बार झुकेगी या आंदोलन और भड़केगा?