प्रयागराज: मौनी अमावस्या पर राजकीय स्नान से रोके जाने के बाद से धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आखिरकार माघ मेला क्षेत्र छोड़ दिया है। उन्होंने बिना गंगा स्नान किए ही काशी (वाराणसी) जाने का निर्णय लिया। जाने से पहले उन्होंने मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कालनेमि’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए धर्म और राजनीति के बीच की लकीर खींच दी।
बयान के मुख्य अंश: योगी और हिंदुत्व पर वारअसली-नकली हिंदू का फर्क: अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आज देश को ‘असली और नकली हिंदू’ के बीच का फर्क समझने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग सत्ता में बैठकर संतों का अपमान कर रहे हैं, वे धर्म के सच्चे रक्षक नहीं हो सकते।
योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी: मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में दिए गए ‘कालनेमि’ (छद्म भेषी राक्षस) वाले बयान पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरकार संतों की मर्यादा को चोट पहुंचा रही है। उन्होंने कहा, “प्रशासन मुझे सुविधाएं देकर संतुष्ट करना चाहता है, लेकिन मेरे शिष्यों के साथ जो मारपीट हुई, उस पर कोई बोलने को तैयार नहीं।”
बिना स्नान रवानगी: शंकराचार्य ने संकल्प लिया था कि वे तभी स्नान करेंगे जब उन्हें ससम्मान संगम ले जाया जाएगा। सम्मान न मिलने के कारण उन्होंने बिना स्नान किए ही प्रयाग छोड़ दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि : तारीखघटनाक्रम19 जनवरीमौनी अमावस्या पर पालकी और राजकीय सम्मान के साथ स्नान से रोका गया।22 जनवरीCM योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ का जिक्र किया, जो धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर कर रहे हैं।26 जनवरीअविमुक्तेश्वरानंद ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे का समर्थन कर उसे ‘हिंदू धर्म का
प्रयाग छोड़ काशी रवाना हुए अविमुक्तेश्वरानंद: ‘असली और नकली हिंदू’ पर दिया बड़ा बयान
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