नई दिल्ली: सप्ताह में 5 दिन काम (5-Day Work Week) की मांग को लेकर आज देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों ने एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की। इस हड़ताल का व्यापक असर देश की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिला है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, अकेले एक दिन में करीब 50,000 करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार और चेक क्लीयरेंस प्रभावित हुआ है।
क्यों हुई हड़ताल?
यह विरोध प्रदर्शन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर किया गया है। यूनियनों की मुख्य मांग है कि बैंक कर्मचारियों के लिए भी अन्य वित्तीय संस्थानों (जैसे RBI और LIC) की तर्ज पर शनिवार और रविवार को पूर्ण अवकाश घोषित किया जाए। हालांकि सरकार और बैंक संघ (IBA) के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा न निकलने के कारण कर्मचारियों ने हड़ताल का रास्ता चुना।
- क्या-क्या हुआ प्रभावित?
- चेक क्लीयरेंस: देश के प्रमुख क्लीयरिंग हाउस ठप होने से करोड़ों के चेक अटक गए हैं।
- कैश ट्रांजैक्शन: शाखाओं में नकद जमा और निकासी की सुविधा पूरी तरह बंद रही।
- एटीएम (ATM): 25 जनवरी (रविवार) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) की छुट्टियों के तुरंत बाद हड़ताल होने के कारण कई शहरों में एटीएम खाली हो गए हैं।
व्यापारिक लेनदेन: व्यापारियों के बड़े पेमेंट और आरटीजीएस (RTGS) जैसे काम प्रभावित हुए।
निजी बैंकों की स्थिति:
गनीमत यह रही कि HDFC, ICICI और Axis जैसे प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंक इस हड़ताल का हिस्सा नहीं थे, इसलिए वहां सामान्य कामकाज जारी रहा। इसके अलावा, नेट बैंकिंग, यूपीआई (UPI) और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं।