मेक इन इंडिया: जालंधर के खेल उत्पाद और कानपुर का लेदर अब यूरोप के हर घर तक, जीरो ड्यूटी का मिलेगा फायदा।

नई दिल्ली : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए “मदर ऑफ ऑल डील्स” (FTA) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नए युग की शुरुआत कर दी है। इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत से होने वाले 99.5% निर्यात पर टैरिफ (सीमा शुल्क) खत्म कर देगा। इसका सीधा सकारात्मक असर देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों और वहां के खास सेक्टर्स पर पड़ने वाला है।

कानपुर (उत्तर प्रदेश) के लेदर प्रोडक्ट्स (चमड़े के सामान) को इसका सीधा फायदा होगा। ये दोनों क्लस्टर भारत के प्रमुख निर्यात केंद्र हैं, जहां हजारों MSME और कारीगर काम करते हैं।

मुख्य फायदे:

खेल उत्पाद (Sports Goods): जालंधर भारत का स्पोर्ट्स गुड्स हब है, जहां क्रिकेट बैट, बॉल, फुटबॉल, हॉकी स्टिक जैसे आइटम बनते हैं। EU में पहले 4-5% तक ड्यूटी लगती थी, अब जीरो ड्यूटी से ये उत्पाद यूरोप के हर घर तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे निर्यात बढ़ेगा और स्थानीय रोजगार को बल मिलेगा।

लेदर प्रोडक्ट्स (Leather Goods): कानपुर चमड़े का बड़ा केंद्र है, जहां जूते, बैग, बेल्ट, हार्नेस और अन्य लेदर आइटम बनते हैं। EU में लेदर और फुटवियर पर पहले 17% तक टैरिफ था, जो अब जीरो हो गया। इससे कानपुर-अगरा जैसे क्लस्टर में डिजाइन-बेस्ड एक्सपोर्ट बढ़ेगा और USD 100 बिलियन के EU लेदर मार्केट में भारत की हिस्सेदारी मजबूत होगी।

यह FTA मेक इन इंडिया पहल को नई ताकत देगा, क्योंकि ये सेक्टर आत्मनिर्भर भारत के मजबूत स्तंभ हैं। लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा, MSME को वैश्विक बाजार में बढ़त मिलेगी और भारत का निर्यात यूरोप में नई ऊंचाइयां छुएगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता भारतीय कारीगरों और उद्योगों के लिए “मेड इन इंडिया” को यूरोप के हर घर तक पहुंचाने का सुनहरा अवसर है!

जीरो ड्यूटी एक्सेस: भारत का लगभग $33 बिलियन का निर्यात, जिस पर अभी 4% से 26% तक टैक्स लगता है, अब बिना किसी टैक्स के यूरोप जाएगा।

चीन का विकल्प: यह समझौता भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में ‘चीन-प्लस-वन’ गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा।

एमएसएमई (MSME) को मजबूती: छोटे और मध्यम उद्योगों को सीधे यूरोपीय बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ेगा।

रोजगार पर असर:
विशेषज्ञों का मानना है कि अकेले टेक्सटाइल, लेदर और जेम्स सेक्टर में अगले 3 वर्षों में लाखों नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। इंजीनियरिंग और फार्मा सेक्टर्स में भी स्किल्ड प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी।