महोबा: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में स्थित ऐतिहासिक मंगलगढ़ दुर्ग (Mangalgarh Fort) अब अपनी खोई हुई रौनक वापस पाने के लिए तैयार है। पिछले तीन दशकों से यह किला सेना और DRDO के नियंत्रण में था, जिसके कारण आम जनता का यहाँ प्रवेश प्रतिबंधित था। अब सेना की वापसी के बाद, जिला प्रशासन ने इसे पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
30 साल बाद खुली किस्मत
महोबा जिले के चरखारी में स्थित यह दुर्ग सामरिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
सेना का नियंत्रण: पिछले 30 सालों से यह दुर्ग डीआरडीओ के अधीन था। हाल ही में सेना की वापसी के बाद यह खाली हुआ है।
वर्तमान स्थिति: लंबे समय तक बंद रहने के कारण किला परिसर में घने जंगल उग आए हैं। प्रशासन अब इसकी साफ-सफाई और जीर्णोद्धार पर ध्यान दे रहा है।
पर्यटन के लिए मास्टर प्लान तैयार
जिलाधिकारी (DM) महोबा ने हाल ही में अपने परिवार के साथ इस किले का दौरा किया और इसकी भव्यता का जायजा लिया। प्रशासन की योजना के अनुसार:
जीर्णोद्धार: किले की प्राचीन दीवारों और ढांचों को फिर से संवारा जाएगा।
रतन सागर तालाब: किले के पास स्थित ऐतिहासिक रतन सागर तालाब को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा।
बजट और विकास: पर्यटन विभाग को यह किला सौंपने की तैयारी है, जिसके बाद एक बड़े बजट के साथ यहाँ लाइटिंग, बैठने की व्यवस्था और गाइड की सुविधा शुरू की जाएगी।
बुंदेलखंड के विकास को मिलेगी रफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार, बुंदेलखंड के ऐतिहासिक किलों को ‘हेरिटेज होटल’ और ‘टूरिस्ट स्पॉट’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंगलगढ़ दुर्ग का मुक्त होना इस दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि पर्यटकों को भी एक नया गंतव्य मिलेगा।