पटना: बिहार की सियासत और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के इतिहास में आज का दिन (25 जनवरी 2026) बेहद महत्वपूर्ण दर्ज किया गया है। पटना में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लालू प्रसाद यादव ने बड़ा फैसला लेते हुए तेजस्वी यादव को आरजेडी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया है। हालांकि, लालू यादव खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे, लेकिन अब पार्टी के रोजमर्रा के फैसलों और सांगठनिक कमान की असली शक्ति तेजस्वी के पास होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला? : पार्टी सूत्रों और राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस फैसले के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
लालू यादव का स्वास्थ्य: 77 वर्षीय लालू प्रसाद यादव पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे हैं। ऐसे में पार्टी को एक सक्रिय और युवा नेतृत्व की जरूरत थी जो धरातल पर दौड़-भाग कर सके।
उत्तराधिकार का स्पष्ट संदेश: तेजस्वी को आधिकारिक तौर पर ‘कार्यकारी अध्यक्ष’ बनाकर लालू यादव ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य में पार्टी का नेतृत्व तेजस्वी ही करेंगे। इससे पार्टी के भीतर किसी भी तरह के भ्रम या गुटबाजी की गुंजाइश खत्म हो गई है।
2025 चुनाव के बाद का बदलाव: हालिया विधानसभा चुनावों में आरजेडी के प्रदर्शन के बाद संगठन में बड़े बदलाव की मांग उठ रही थी। तेजस्वी की ताजपोशी को पार्टी को ‘री-ब्रैंड’ करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
लालू यादव ने खुद सौंपा नियुक्ति पत्र
बैठक के दौरान एक भावुक पल तब आया जब लालू प्रसाद यादव ने अपने हाथों से तेजस्वी यादव को नियुक्ति पत्र सौंपा। इस मौके पर राबड़ी देवी, मीसा भारती और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। आरजेडी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इसे “एक नए युग का शुभारंभ” करार दिया है।
पारिवारिक कलह की सुगबुगाहट
तेजस्वी की इस ताजपोशी के बीच लालू परिवार की आंतरिक कलह भी सतह पर आ गई है।
रोहिणी आचार्य का हमला: तेजस्वी की नियुक्ति से ठीक पहले उनकी बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर ‘साजिशकर्ताओं और घुसपैठियों’ का जिक्र कर सियासी हलचल तेज कर दी।
तेज प्रताप की स्थिति: बड़े भाई तेज प्रताप यादव पहले ही पार्टी से अलग होकर अपनी नई राह (जनशक्ति जनता दल) चुन चुके हैं, जिससे तेजस्वी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।