प्रयागराज: संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले में उस वक्त भारी तनाव व्याप्त हो गया जब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने ‘बुलडोजर बाबा जिंदाबाद’ के नारे लगाए, जिसके बाद शंकराचार्य ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
विवाद की जड़: क्या है पूरी कथा?
इस विवाद की शुरुआत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा हाल ही में दिए गए कुछ बयानों और शिविर में हो रही गतिविधियों को लेकर हुई।
गौ-राष्ट्र ध्वज का मुद्दा: शंकराचार्य ने गाय को ‘राष्ट्र माता’ घोषित करने के संकल्प के साथ एक विशेष ध्वज फहराने का कार्यक्रम रखा था।
नारेबाजी का कारण: विरोधियों का आरोप है कि शंकराचार्य के कुछ बयान सरकार की नीतियों के खिलाफ हैं। इसी के विरोध में कुछ गुटों ने उनके शिविर के बाहर पहुंचकर ‘बुलडोजर बाबा जिंदाबाद’ और धार्मिक नारेबाजी शुरू कर दी।
शंकराचार्य का बड़ा बयान: “मेरी हत्या की साजिश”
शिविर के बाहर हुए इस हंगामे के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस को संबोधित करते हुए भावुक और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा:
“मेरे शिविर के बाहर जिस तरह से अनियंत्रित भीड़ ने नारेबाजी की और मुझे डराने का प्रयास किया, उससे स्पष्ट है कि मेरी जान को खतरा है। प्रशासन की मौजूदगी में ऐसी घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह उन्हें उनके धार्मिक संकल्पों से डिगाने की एक संगठित साजिश है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा
हंगामे की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
पुलिस का घेरा: शंकराचार्य के शिविर के चारों ओर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
जांच के आदेश: मेला प्रशासन उन लोगों की पहचान कर रहा है जिन्होंने शिविर के बाहर उत्तेजक नारे लगाए और अशांति फैलाने की कोशिश की।
हाई अलर्ट: माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में पीएसी (PAC) तैनात कर दी गई है।
सियासी उबाल
‘बुलडोजर बाबा’ के नारों ने इस विवाद को धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक रंग भी दे दिया है। विपक्ष ने इसे साधु-संतों का अपमान बताया है, वहीं समर्थकों का कहना है कि यह केवल वैचारिक विरोध था।