26 जनवरी से पहले गोरखपुर में ‘युद्ध’ जैसा मंजर: ब्लैकआउट के बीच वायुसेना का एयर अटैक मॉक ड्रिल

गोरखपुर: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण गोरखपुर एयरबेस और आस-पास के क्षेत्रों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अचानक पूरे इलाके में ‘ब्लैकआउट’ कर दिया गया। देखते ही देखते आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनाई देने लगी और माहौल बिल्कुल युद्ध जैसा हो गया। दरअसल, यह भारतीय वायुसेना और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा तैयारियों को पुख्ता करने के लिए किया गया एक ‘मॉक ड्रिल’ था।

अंधेरे में डूबा इलाका, आसमान में ‘दुश्मन’ पर वार
मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पूरे सैन्य क्षेत्र और उससे सटे नागरिक इलाकों में लाइटें बंद कर ब्लैकआउट की स्थिति पैदा की गई। इसका मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि दुश्मन के हवाई हमले की स्थिति में शहर और एयरबेस खुद को कैसे सुरक्षित रखते हैं।

रणनीति: ब्लैकआउट के दौरान वायुसेना के रडार और डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किया गया।

प्रतिक्रिया: वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने आसमान में करतब दिखाते हुए काल्पनिक ‘दुश्मन’ के विमानों को खदेड़ने का अभ्यास किया।

समन्वय: इस दौरान पुलिस, प्रशासन और वायुसेना के बीच जबरदस्त तालमेल देखने को मिला।

सुरक्षा एजेंसियों का ‘हाई अलर्ट’

गणतंत्र दिवस पर आतंकी खतरों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए गोरखपुर में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। इस ड्रिल के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि:

कमांड एंड कंट्रोल: हमले की सूचना मिलने पर रिस्पांस टाइम कितना कम रखा जा सकता है।

नागरिक सुरक्षा: अंधेरे के दौरान कानून-व्यवस्था और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं का संचालन कैसे होगा।

एंटी-ड्रोन सिस्टम: आधुनिक खतरों से निपटने के लिए तकनीक का सफल परीक्षण किया गया।

आम जनता में कौतूहल और गर्व
अचानक हुए इस अभ्यास से शुरुआत में लोग थोड़े अचंभित हुए, लेकिन जल्द ही ड्रिल की जानकारी मिलने पर गर्व का माहौल बन गया। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास सेना की तत्परता को धार देने के लिए नियमित रूप से किए जाते हैं, विशेषकर राष्ट्रीय पर्वों के समय।