बड़ा फैसला: राष्ट्रगान की तरह ‘वन्दे मातरम’ के सम्मान में खड़ा होना होगा अनिवार्य, नियम बनाने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की भावना को और सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम’ के लिए भी वही प्रोटोकॉल लागू किए जा सकते हैं जो वर्तमान में राष्ट्रगान (जन-गण-मन) के लिए अनिवार्य हैं। इसके तहत अब वन्दे मातरम बजने या गाए जाने के दौरान भी नागरिकों को सम्मान में खड़ा होना होगा।

नए नियमों का मसौदा तैयार

सरकार एक नया नियम या गाइडलाइन लाने पर विचार कर रही है, जिससे राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के बीच के अंतर को प्रोटोकॉल के स्तर पर खत्म किया जा सके।

समान सम्मान: सरकार का मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम में वन्दे मातरम की भूमिका ऐतिहासिक रही है, इसलिए इसे राष्ट्रगान के समान ही संवैधानिक सम्मान मिलना चाहिए।

संस्थानों के लिए निर्देश: यह नियम सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए अनिवार्य किए जा सकते हैं।

कानूनी ढांचा: गृह मंत्रालय इस संबंध में मौजूदा नियमों में संशोधन या नए दिशा-निर्देशों के कानूनी पहलुओं की जांच कर रहा है।

क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?

अदालतों में पहले भी कई बार राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। सरकार के इस कदम का उद्देश्य:

राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति देश में एकरूपता लाना।

नई पीढ़ी में राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाना।

स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना।

क्या कहते हैं मौजूदा नियम?
वर्तमान में ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ के तहत राष्ट्रगान के दौरान खड़ा होना और उसका सम्मान करना अनिवार्य है। हालांकि, वन्दे मातरम के लिए अभी तक इस तरह का कोई कड़ा दंडनीय नियम स्पष्ट नहीं था, जिसे अब औपचारिक रूप दिया जा रहा है।

“वन्दे मातरम हमारी आजादी की लड़ाई का मूल मंत्र था। इसे वही सम्मान मिलना चाहिए जो राष्ट्रगान को मिलता है।”