नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (22 जनवरी 2026) को ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की 11वीं वर्षगांठ पर देशवासियों को बेटियों के प्रति अपनी सोच बदलने और उनके महत्व को समझने का संदेश दिया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में बेटियों का स्थान कितना ऊंचा है।
क्या है वह श्लोक और इसका अर्थ?
प्रधानमंत्री ने स्कंद पुराण के एक प्रसिद्ध सुभाषित को साझा किया:
“दशपुत्रसमा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन्। यत् फलम् लभते मर्त्यस्तल्लभ्यं कन्ययैकया॥”
इसका अर्थ है: एक पुत्री दस पुत्रों के समान होती है। दस पुत्रों के पालन-पोषण और उनके गुणों से जो पुण्य या फल एक मनुष्य को प्राप्त होता है, वही फल केवल एक कन्या के उत्तम पालन-पोषण और उसकी प्रगति से प्राप्त किया जा सकता है।
’11 साल और गौरवशाली उपलब्धियां’
पीएम मोदी ने कहा कि 11 साल पहले शुरू किया गया ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान आज एक जन-आंदोलन बन चुका है। उन्होंने देश की बेटियों की सराहना करते हुए कहा:
हर क्षेत्र में रिकॉर्ड: आज भारत की बेटियां अंतरिक्ष से लेकर खेल के मैदान तक और तकनीक से लेकर रक्षा क्षेत्र तक नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।
बदली सामाजिक सोच: इस अभियान ने समाज में बेटियों को देखने के नजरिए में क्रांतिकारी बदलाव लाया है।
सुकन्या समृद्धि योजना: इसी अभियान का हिस्सा रही सुकन्या समृद्धि योजना के भी आज 11 साल पूरे हो गए हैं, जिससे करोड़ों बेटियों का भविष्य सुरक्षित हुआ है।