लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के फॉर्मूले से सफलता पाने वाले अखिलेश यादव अब अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, 20 जनवरी 2026 को अखिलेश यादव कुछ ऐसे कदम उठाने जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने और अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने से जुड़े हैं।
20 जनवरी का संभावित ‘मास्टर प्लान’:
माना जा रहा है कि इस दिन अखिलेश यादव निम्नलिखित बड़ी घोषणाएं या कार्यक्रम कर सकते हैं:
संगठन का विस्तार: उत्तर प्रदेश के उन जिलों में नई कमेटियों और प्रभारियों की घोषणा, जहाँ हालिया उपचुनावों या सर्वे में सपा को जमीनी पकड़ कमजोर दिखी है।
‘पीडीए’ जनसंपर्क अभियान का दूसरा चरण: अखिलेश यादव 20 जनवरी से प्रदेश व्यापी एक नए जनसंपर्क अभियान की रूपरेखा सामने रख सकते हैं, जिसका मुख्य फोकस युवा मतदाताओं और महिलाओं पर होगा।
वोटर लिस्ट अभियान पर जोर: जैसा कि सपा लगातार आरोप लगाती रही है, 20 जनवरी से पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि विपक्षी समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से न कटे हों।
बड़ी ज्वाइनिंग: लखनऊ में सपा मुख्यालय पर अन्य दलों के कुछ प्रभावशाली स्थानीय नेताओं को पार्टी में शामिल किया जा सकता है।
हैट्रिक बनाम वापसी: भाजपा जहाँ 2027 में जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है, वहीं अखिलेश यादव इसे ‘करो या मरो’ का मुकाबला मान रहे हैं।
महिला सम्मान योजना: अखिलेश पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि सपा सरकार आने पर महिलाओं को आर्थिक मदद दी जाएगी। 20 जनवरी को वह इस वादे को और गहराई से जनता तक पहुँचाने की योजना जारी कर सकते हैं।
सपा की रणनीति के 3 मुख्य स्तंभ:
जातीय जनगणना: इसे चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाना।
आउटसोर्सिंग का विरोध: सरकारी नौकरियों में आउटसोर्सिंग खत्म कर पक्की नौकरी का वादा।
किसान और नौजवान: आवारा पशुओं की समस्या और बेरोजगारी पर सरकार को घेरना।