यूपी : भारतीय जनता पार्टी के नए ‘खेवनहार’ यानी राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने के लिए 20 जनवरी 2026 को मतदान होना तय हुआ है। लेकिन इस ऐतिहासिक चुनाव में पार्टी की नींव रखने वाले दो दिग्गज—लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी—मतदाता सूची (Electoral College) का हिस्सा नहीं हैं। 1980 में भाजपा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब ये दोनों नेता इस प्रक्रिया से बाहर हुए हैं।
क्यों नहीं डाल पाएंगे वोट? (मुख्य कारण)
रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका कारण कोई राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि तकनीकी और सांगठनिक पेच है
दिल्ली संगठन के चुनाव: आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी दोनों दिल्ली से आते हैं। भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में वे लोग वोट डालते हैं जो राष्ट्रीय परिषद (National Council) के सदस्य होते हैं।
राष्ट्रीय परिषद का अधूरा गठन: दिल्ली प्रदेश संगठन के चुनाव अभी तक संपन्न नहीं हो पाए हैं। इस वजह से दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का निर्वाचन नहीं हो सका है।
नियमों की बाध्यता: चूंकि दिल्ली से डेलीगेट्स और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य आधिकारिक रूप से नहीं चुने गए हैं, इसलिए तकनीकी आधार पर इन दोनों दिग्गजों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया।
मार्गदर्शक मंडल और बदलती भूमिका
यह भी गौर करने वाली बात है कि ये दोनों वरिष्ठ नेता पार्टी के ‘मार्गदर्शक मंडल’ का हिस्सा हैं। पिछले कुछ वर्षों से वे सक्रिय चुनावी राजनीति और संगठनात्मक निर्णयों से दूर रहे हैं। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति को पार्टी के भीतर एक ‘युग के अंत’ के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनाव का पूरा गणित:
अध्यक्ष पद के दावेदार: फिलहाल कई नामों पर चर्चा है, लेकिन अंतिम मुहर 20 जनवरी को लग सकती है।
प्रक्रिया: भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तब होता है जब कम से कम 50% राज्यों में सांगठनिक चुनाव पूरे हो चुके हों।
मतदाता: सांसद, विधायक और राज्यों से चुने गए राष्ट्रीय परिषद के सदस्य इस चुनाव में हिस्सा लेते हैं।