यूपी: सपा सांसद की नाराजगी और पूर्व PM के बेटे की सफाई; मुख्य अतिथि न बनाए जाने पर छिड़ा सियासी घमासान

मेरठ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रोटोकॉल और मान-सम्मान को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद को ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में आमंत्रित न किए जाने पर उन्होंने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। इस मामले के तूल पकड़ते ही पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे और वरिष्ठ नेता ने स्थिति को संभालने के लिए अपनी सफाई पेश की है।

क्या है पूरा मामला?
मामला एक क्षेत्रीय विकास परियोजना या जनसभा (हालिया संदर्भों के अनुसार अक्सर चौधरी चरण सिंह की विरासत से जुड़े कार्यक्रमों में ऐसा देखा गया है) से जुड़ा है। सपा सांसद का आरोप है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि होने के नाते प्रोटोकॉल के तहत उन्हें मुख्य अतिथि या विशिष्ट अतिथि के तौर पर सम्मान मिलना चाहिए था। लेकिन, आयोजकों ने उन्हें नजरअंदाज किया, जिसे उन्होंने अपनी पार्टी और जनता का अपमान बताया।

सपा सांसद ने कहा, “विपक्ष के जनप्रतिनिधियों को सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रमों में हाशिए पर धकेलना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है।”

पूर्व PM के बेटे ने दी सफाई
विवाद बढ़ता देख पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी (या उनके परिवार से जुड़े नेतृत्व) ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को भी अपमानित करने का कोई इरादा नहीं था।

सफाई में कहा गया कि:

कार्यक्रम की रूपरेखा और अतिथियों की सूची स्थानीय आयोजकों और तकनीकी प्रोटोकॉल के आधार पर तय की गई थी।

समय की कमी या किन्हीं तकनीकी कारणों से नाम छूट जाना एक मानवीय त्रुटि हो सकती है, न कि राजनीतिक द्वेष।

उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों का सम्मान करने की बात दोहराई और मामले को बेवजह तूल न देने की अपील की।

गठबंधन और आपसी तालमेल पर सवाल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की छोटी-छोटी नाराजगी भविष्य में गठबंधन या क्षेत्रीय समीकरणों पर असर डाल सकती है। सपा और आरएलडी के बीच अक्सर समन्वय को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं, ऐसे में मुख्य अतिथि जैसे मुद्दे कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित करते हैं।