मौनी अमावस्या: संगम तट पर आस्था का जनसैलाब, सुबह 8 बजे तक 1 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

प्रयागराज : तीर्थराज प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व ‘मौनी अमावस्या’ पर श्रद्धा और विश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद, संगम की रेती पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। मेला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, आज सुबह 8:00 बजे तक करीब 1 करोड़ श्रद्धालु पवित्र त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं।

ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू हुआ स्नान
रविवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय माँ गंगे’ के उद्घोष के साथ श्रद्धालुओं का स्नान शुरू हो गया। मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। संगम तट के सभी 12 घाटों पर तिल रखने की भी जगह नहीं है। श्रद्धालु न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और नेपाल जैसे दूर-दराज के इलाकों से यहाँ पहुँचे हैं।

फूलों की वर्षा और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिसने मेले के वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है:

सीसीटीवी और ड्रोन: पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जा रही है।

सुरक्षा बल: पीएसी, एटीएस और आरएएफ की टुकड़ियों के साथ हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं।

जल पुलिस: संगम की गहराई और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जल पुलिस और गोताखोर निरंतर गश्त कर रहे हैं।

कोहरे और ठंड पर भारी पड़ी आस्था
सुबह के समय विजिबिलिटी बहुत कम थी और तापमान में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। घाटों पर रोशनी के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि अंधेरे और कोहरे में किसी को परेशानी न हो। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) के लिए वन-वे रूट लागू किया है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।

धार्मिक महत्व
मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन संगम का जल अमृत के समान हो जाता है। आज के दिन मौन व्रत रखकर गंगा स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।