मोतिहारी : बिहार की धरती पर आज एक गौरवशाली अध्याय जुड़ गया। केसरिया-चकिया मार्ग पर स्थित कैथवलिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में शनिवार (17 जनवरी) को विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा और स्थापना संपन्न हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की और इस भव्य परियोजना का अवलोकन किया।
- शिवलिंग की अद्भुत विशेषताएं
यह शिवलिंग न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि इंजीनियरिंग और कला के नजरिए से भी बेमिसाल है:
वजन: इसका कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन (2.10 लाख किलो) है।
ऊंचाई और गोलाई: इसकी ऊंचाई 33 फीट और गोलाई भी 33 फीट है।
निर्माण: इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ब्लैक ग्रेनाइट के एक ही विशाल पत्थर (Monolithic Stone) को तराश कर बनाया गया है।
सहस्त्रलिंगम: इस मुख्य शिवलिंग पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जिसे ‘सहस्त्रलिंगम’ कहा जाता है।
- CM नीतीश कुमार की उपस्थिति और ‘समृद्धि यात्रा’
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोपहर करीब 11:50 बजे हेलीकॉप्टर से मंदिर परिसर पहुंचे। उन्होंने शिवलिंग की स्थापना प्रक्रिया का निरीक्षण किया और विधि-विधान से पूजन किया। मुख्यमंत्री के साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और अन्य वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद रहे। इस दौरान हेलीकॉप्टर से पूरे मंदिर परिसर और शिवलिंग पर पुष्पवर्षा की गई, जिसने माहौल को भक्तिमय बना दिया। - स्थापना के लिए मंगाए गए विशाल क्रेन
210 टन वजनी इस भारी शिवलिंग को इसके निर्धारित आधार (Argha) पर स्थापित करना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए विशेष रूप से:
भोपाल और बंगाल से 700 टन और 500 टन की क्षमता वाले दो विशाल क्रेन मंगाए गए थे।
स्थापना से पहले सफल मॉक ड्रिल की गई और फिर इसे 36 फीट ऊंचे आधार पीठ पर विराजमान किया गया।
- विराट रामायण मंदिर: एक नज़र में
महावीर मंदिर ट्रस्ट (पटना) द्वारा बनवाया जा रहा यह मंदिर परिसर दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू आध्यात्मिक केंद्र बनने की राह पर है:
क्षेत्रफल: 120 एकड़ में फैला परिसर।
शिखर: इसमें कुल 12 शिखर होंगे, जिनमें मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी।
क्षमता: मंदिर का हॉल इतना विशाल होगा कि एक साथ हजारों श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।