वाराणसी: सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान और दान का अनंत फल मिलता है। 18 जनवरी को पड़ने वाली इस अमावस्या पर धर्म नगरी काशी के सभी 84 घाटों पर भव्य आयोजन की तैयारी है। दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर विशेष सुरक्षा और प्रबंधन किए गए हैं।
- मौनी अमावस्या: स्नान का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत और स्नान के लिए सर्वोत्तम समय निम्नलिखित है:
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 17 जनवरी 2026, शाम से।
अमावस्या तिथि समाप्त: 18 जनवरी 2026, शाम तक।
अमृत सिद्धि योग (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 05:20 बजे से सुबह 06:15 बजे तक स्नान करना सबसे फलदायी रहेगा।
पूरा दिन पुण्य काल: सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा सकेंगे।
- ‘मौन’ रहने का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मनुष्य को ‘मौन’ रहकर गंगा स्नान और जप-तप करना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था, इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। मौन रहने से मानसिक शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है। - काशी में भव्य तैयारियां
वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं:
ड्रोन से निगरानी: गंगा के घाटों और गलियों में सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरे तैनात रहेंगे।
फ्लोटिंग जेटी और बैरिकेडिंग: गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए गंगा के बीच में मजबूत बैरिकेडिंग की गई है।
एनडीआरएफ और जल पुलिस: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बचाव दल गंगा में मुस्तैद रहेंगे।
क्रूज और नौका संचालन: सुरक्षा कारणों से स्नान के मुख्य समय के दौरान बड़े क्रूज और तेज रफ्तार नावों पर प्रतिबंध रहेगा।
- दान का विशेष महत्व
इस दिन तिल, गुड़, गर्म कपड़े और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। काशी के विद्वानों का कहना है कि मौनी अमावस्या पर किया गया दान पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति कराता है।