मुंबई में ‘कमल’ का कमाल; शिंदे ने बचाई साख, ‘ठाकरे ब्रदर्स’ को बड़ा झटका और ओवैसी की सरप्राइज एंट्री

मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका (BMC) के चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। 227 सीटों वाली बीएमसी में भाजपा 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ मिलकर भाजपा ने 118 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे अब बीएमसी पर महायुति का कब्जा तय हो गया है।

1. भाजपा का ऐतिहासिक ‘कब्जा’मुंबई नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार है जब भाजपा ने अकेले दम पर इतनी बड़ी जीत हासिल की है। इसे देवेंद्र फडणवीस की रणनीति और ‘ब्रांड मोदी’ की जीत माना जा रहा है। भाजपा ने न केवल गुजराती और हिंदी भाषी क्षेत्रों में, बल्कि मराठी बाहुल्य इलाकों में भी सेंधमारी की है।

2. एकनाथ शिंदे ने बचाई साखभले ही शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिली हों, लेकिन ये सीटें सरकार बनाने के लिए निर्णायक साबित हुई हैं। शिंदे ने ठाणे और मुंबई के कुछ खास पॉकेट्स में अपना प्रभाव बनाए रखा, जिससे उद्धव ठाकरे को कड़ी टक्कर मिली। शिंदे की इस परफॉरमेंस ने महायुति में उनकी अहमियत को और बढ़ा दिया है।

3. ‘ठाकरे ब्रदर्स’ के लिए बड़ा झटकाउद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT) और राज ठाकरे (MNS) के लिए ये नतीजे किसी झटके से कम नहीं हैं।उद्धव ठाकरे: उनकी पार्टी 65 सीटों पर सिमट गई। वर्षों तक बीएमसी पर राज करने वाली सेना के हाथ से सत्ता निकलना उद्धव के लिए बड़ी राजनीतिक हार है।राज ठाकरे: ‘ठाकरे ब्रदर्स’ की एकजुटता और एमएनएस-यूबीटी के संभावित तालमेल की चर्चाओं के बावजूद राज ठाकरे की मनसे सिर्फ 6 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई।

4. ओवैसी की ‘पतंग’ ने भरी ऊंची उड़ानइस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का प्रदर्शन रहा। ओवैसी की ‘पतंग’ मुंबई के आसमान में खूब उड़ी और पार्टी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की। AIMIM ने मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है।