यूपी : उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 1912 टोल-फ्री हेल्पलाइन पर दर्ज 13,210 शिकायतें तय समय सीमा बीतने के बाद भी निस्तारण नहीं हुई हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए राज्य सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
परिषद के अनुसार लंबित शिकायतों का ब्यौरा इस प्रकार है:
- मध्यांचल: 3,618
- पूर्वांचल: 2,213
- पश्चिमांचल: 2,064
- केस्को: 3,165
- दक्षिणांचल: 2,150
- कुल: 13,210 शिकायतें
ये शिकायतें ज्यादातर ट्रांसफॉर्मर फॉल्ट, मीटर खराबी, बिलिंग गड़बड़ी, नया कनेक्शन और बिजली कटौती जैसी आम समस्याओं से जुड़ी हैं। विशेष रूप से वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद (जैसे लखनऊ और नोएडा में) स्थिति और खराब बताई जा रही है, जहां उपभोक्ताओं के पास शिकायत दर्ज करने का विकल्प सीमित हो गया है।
परिषद की मांगें:
- तय समय सीमा में शिकायतों के निस्तारण की जांच हो।
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
- सिस्टम में सुधार के साथ प्रभावी मॉनिटरिंग लागू हो, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार परेशान न होना पड़े।
यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब हाल ही में स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियां और ओवरचार्जिंग के आरोप भी सामने आए हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि विभाग की ओर से शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे आम जनता को खासी परेशानी हो रही है।