लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने जन्मदिन (जन कल्याणकारी दिवस) के मौके पर देश की राजनीति को लेकर बड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने गठबंधन की अटकलों पर विराम लगाते हुए घोषणा की है कि बसपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सहित देश में कहीं भी होने वाले आगामी चुनावों में किसी भी पार्टी के साथ समझौता नहीं करेगी।
मायावती के संबोधन की 5 बड़ी बातें:
एकला चलो की नीति: मायावती ने कहा कि गठबंधन करने से बसपा को फायदे की जगह नुकसान होता है। गठबंधन की दूसरी पार्टियों का वोट बसपा को ट्रांसफर नहीं हो पाता, जबकि बसपा का कैडर वोट पूरी ईमानदारी से सहयोगी दल को वोट दे देता है।
2007 का फॉर्मूला: उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि 2007 में भी बसपा ने अकेले चुनाव लड़कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। 2027 में भी पार्टी उसी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के नारे के साथ मैदान में उतरेगी।
सपा और भाजपा पर निशाना: मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों को दलित विरोधी बताते हुए कहा कि ये दल केवल चुनाव के समय ही दलितों और पिछड़ों को याद करते हैं।
EVM पर सवाल: उन्होंने एक बार फिर चुनाव आयोग से मतपत्र (Ballot Paper) से चुनाव कराने की मांग दोहराई और कहा कि निष्पक्ष चुनाव होने पर बसपा की जीत निश्चित है।
आकाश आनंद की भूमिका: उन्होंने संकेत दिए कि पार्टी का युवा चेहरा और उनके उत्तराधिकारी आकाश आनंद आने वाले चुनावों में युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए देशव्यापी अभियान चलाएंगे।
विपक्ष में खलबली
मायावती के इस ऐलान से विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। खासकर ‘इंडिया गठबंधन’ की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है, जो दलित वोटों के बिखराव को रोकने के लिए बसपा को साथ लाने की चर्चा कर रहे थे। अब यूपी में 2027 का मुकाबला त्रिकोणीय (BJP vs SP vs BSP) होने के आसार और प्रबल हो गए हैं।